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Showing posts with the label नारी

दोहे ; तन और मन आचार्य संजीव 'सलिल'

प्रश्न चिन्ह मेरा तन मैं बेचता, तुमको क्यों आपत्ति? तुमने कब किसकी हरी, बोलो कहीं विपत्ति? तन की करते फ़िक्र तुम, मन को दिया बिसार। मन ही मन, मन पर किए, कितने ? तन नश्वर बेचा अगर, तो क्यों हाहाकार। शाश्वत निर्मल आत्मा, उसकी करो सम्हार॥ नारी के कौमार्य पर, क्यों रखता तू दृष्टि? पगले क्यों यह भूलता, हुई वहीं उत्पत्ति॥ नर का यदि ख़ुद पर हुआ, मान्य सदा अधिकार। नारी के हक का किया, बोलो क्यों प्रतिकार? --दिव्यनर्मदा.blogspot .com **********************************

कौमार्य बेचा, रात गुजारी अब पछतावा..

प ढ़ाई को अपनी मंजिल तक पहुंचाने के लिए विदेशों में लड़कियां अब किसी भी हद तक जाने से गुरेज नहीं कर रही हैं। और अब लड़कियां अपनी वर्जानिटी (कौमार्य) को भी मजह चंद पैसों में बेच दे रही हैं। कौमार्य बेचने की घटना विदेशों में बढ़ती ही जा रही है। पढ़ाई के लिए कौमार्य बेचने की ढ़ेर सारी घटनाएं सामने आई हैं, जिसे देखकर यही लगता है कि विदेशों में पढ़ाई के लिए युवा किस गलत राह पर जा रहे हैं। चंद रूपयों की खातिर लड़कियां न सिर्फ अपना देह बेच रही हैं बल्कि उनका खुलेआम प्रचार भी कर रही हैं। सबसे बड़ी बात है कि इस गलत तरीके के खिलाफ अभी तक किसी सामाजिक संगठन ने हस्तक्षेप नहीं किया है। आइए डालते हैं लड़कियों के कौमार्य बेचने की घटनाओं पर एक नजर. .. रोजी ने 6 लाख में बेच दिया कौमार्य.. लंदन में पढ़ाई की खातिर 18 साल की रोजी ने अपनी वर्जीनिटी को सिर्फ 6 लाख में बेच दिया। रोजी ने अपने कौमार्य को बेचने के लिए बाकायदा नेट पर नीलामी करवाई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। एक 40 साल के इंजीनियर ने रोजी के कौमार्य को 8400 पाउंड(6 लाख रूपए) में खरीद लिया। जिसके बाद रोजी ने एक होटल में उस इं...

संवेदनाए शून्य, नैतिकता शर्मसारः एक नजर..

विशेषः इस कलयुगी समाज में सारे रिश्तों का ताना-बाना बिगड़ता ही जा रहा है। कहा जाता था कि लड़कियां खुली तिजोरी के समान होती हैं और घर ही उनके लिए सबसे सुरक्षित जगह है। मगर अब लड़कियां अपने ही घर में महफूज नहीं हैं। आए दिन हम बाप का बेटी से बलात्कार करना, शारीरिक संबंध स्थापित करना व अन्य प्रकार की प्रताड़नाए होने की घटनाओं से रूबरू होते हैं। इस तरह की घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि कल का सभ्य समाज आज किस दिशा में जा रहा है। क्या सभी रिश्तों की सीमाएं टूट गई हैं, संवेदनाएं शून्य हो गई हैं या फिर इंसान अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। इस घोर कलयुग में जहां बाप-बेटी में शारीरिक संबंध स्थापित होने की खबर लगतार बढ़ती ही जा रही है वहीं दूसरी तरफ अब मां का रूप सामने निकलकर आ रहा है। एक मां ने अपने सगे बेटे के प्रति आकर्षित होकर उसे ही शारीरिक संबंध बनाने का प्रस्ताव दे डाला। पिछले कुछ दिनों से प्रकाश में ऐसे-ऐसे मामले आए हैं जिन पर सोचकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। आईए डालते हैं कलयुगी मां-बाप के काले कारनामों पर एक नजर... अमीर बनने के लिए बेटियों का शार...

मुस्लिम वोटर राजनैतिक दलों के लिए भेड़ की तरह !

आज एक लेख पड़ा तो लगा राजनीति के नाम पर हिन्दू लगातार मुस्लिमो का शोषण कर रहे है,याकि नहीं आता तो आपका यह लेख पद लेना ही बेहतर है,जिसमे मुस्लिमों की सिसकियाँ भरी हुई है!हिन्दुओं कब तक चलेगा तुम्हारा यह अत्याचार.. चुनाव का मौसम आते ही मुस्लिम वोटों के लिए मारामारी शुरू हो जाती है। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनैतिक दल अपने आपको मुसलमानों का सच्चा हितैषी और हमदर्द बताने लगते हैं। मुस्लिम वोटर इस देश की लोकसभा की कम से कम सौ सीटों पर निर्णायक सिद्ध होते हैं। मुस्लिम वोटों की महत्ता को इसी बात से समझा जा सकता है कि भाजपा भी अक्सर मुसलमानों को रिझाने में जुट जाती है। अपने आपको सेकुलर कहने वाले राजनैतिक दल मुसलमानों को भाजपा का भय दिखाकर उन्हें अपने पाले में करने की कोशिश करते हैं। लेकिन कड़वा सच यह है कि सभी दलों ने मुसलमानों को केवल सब्जबाग दिखाकर छला है। मुसलमानों की आर्थिक व शैक्षिक तरक्की के लिए कोई ईमानदार और ठोस पहल आज तक नहीं हुई है। मुस्लिम वोटर राजनैतिक दलों के लिए भेड़ की तरह हैं, जिसके बाल उतारकर फिर से जंगलों में चरने के लिए छोड़ दिया जाता है। सच्चर समिति की रिपोर्ट आयी लेकिन वह केव...

हीर रांझा के मुल्‍क में फिजा और चाँद

अब फिजा में चाँद नहीं रहेगा। यूँ तो फिजा और चाँद की दूरियां पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ ही रही थीं लेकिन अब चाँद ने तलाक ले लिया है। चाँद और फिजा के बारे में अब तक बहुत कुछ सुना जा चुका है ओर उतना ही लिखा जा चुका है। दोनों के बीच जो भी हुआ कुछ तेज हुआ, तेजी परवान चढ़ी। हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन, चांद मुहम्मद और अनुराधा बाली फिजा बन गए। सब कुछ बड़ी जल्‍दी में हुआ। दोनों ने इसे प्‍यार इश्‍क और मोहब्‍बत का नाम दिया और एक दूसरे से ब्‍याह रचा दिया। समाचार चैनलों, अखबारों में धड़ाधड़ फोटो छपे, बयान आए। चाँद उस फिजा में मुस्‍करा रहा था, और फिजा भी बेहद खुश थी। अब खबर है कि चाँद ने लंदन से ही फोन पर फिजा को तलाक दे दिया है। हाथों की मेंहदी सूखी भी न थी कि चाँद को चंद्रमोहन का परिवार याद आ गया। उसे पहली पत्‍नी ओर बच्‍चे याद आने लगे। आने भी चाहिए थे, आखिर परिवार तो परिवार है। वैसे ये नितांत व्‍यक्‍तिगत मामला है और कोई भी आदमी प्‍यार करने घर बसाने के लिए पूरी तरह से आजाद है। औरत हो या आदमी, राजा हो या रंक, हर किसी को अपनी जिंदगी पूरी तरह से और अपने तरीके से जीने का अधिकार है और आ...

पेट भरने के लिए चकले खुलवाना चाहती हैं महिलाएं!

आतंकवाद ने जम्मू कश्मीर में कई परिवारों को तबाह कर दिया है। हजारों लोग आज भी बेघर हो विस्थापन कैंप में जिंदगी गुजार रहे है। सरकार इन लोगों की खराब हालत के बारे में जानती तो है लेकिन वायदों के सिवाए कुछ नहीं करती। जम्मू के एक इलाके में विस्थापितों की हालत भी कुछ इसी तरह है। लेकिन सिटीज़न जर्नलिस्ट बलवान सिंह पिछले 10 साल से इन लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। उनकी लड़ाई है आतंकवाद की वजह से विस्थापित हुए लोगों को सरकार से मुआवजा दिलवाने के लिए। कश्मीर के बाकी जिलों की तरह रियासी भी आतंकवाद की चपेट में था। खून खराबे के बीच 1998-99 में लगभग 1000 परिवार अपनी जान बचाकर अपना घर बार छोड़ कर तलवाड़ा कैंप पहुंचे। इनके पारिवार के कई लोगों को आतंकियों ने मार दिया और कई को उनके ही घर से खदेड़ दिया। यहां पहुंच कर इनकी जान तो बच गई लेकिन जिंदगी को नए सिरे से दोबारा शुरू करना इनके लिए मुश्किल हो गया। इनके पास न सिर पर छत थी और न खाने की व्यवस्था। बच्चे भूखे मर रहे थे। हालत यहां तक बिगड़े कि अपना पेट पालने के लिए इन्होंने अपने बच्चों को बेचने की मंडी लगाई। कुछ औरतों ने तो सरकार से चकला शुरू करने ...

सेक्स करने से भी ज्यादा जरूरी काम क्या..

अमेरिका में सेक्सुअली एक्टिव द्वारा एक हजार लोगों पर किए गए सर्वे के दौरान एक नई बात निकल कर सामने आई है। इस सर्वे के मुताबिक कम से कम 80 फीसदी लोग किसी न किसी कारणवश अपने सेक्स पार्टनर को सेक्स कर ने से मना कर देते हैं। उधर दूसरी तरफ ऐसा माना जाता है कि जिन्हें सेक्स ज्यादा पसंद है, वे किसी अन्य काम को भी बहुत अच्छे ढंग से करते हैं। लेकिन इस सर्वे में कुछ अलग बात सामने आई है.. 60 फीसदी पुरुष दिन में कम से कम एक बार सेक्स करने के बारे में जरूर सोच-विचार करते हैं। इस सर्वे में पाया गया कि दिन में महिलाओं के मुकबाले पुरुष सेक्स के विषय में ज्यादा सोचते हैं। पुरुष दिन में चाहे वह ऑफिस में हो या अन्य किसी काम में व्यस्त हो, लेकिन उनके मन में सेक्स के बारे में एक बार तो जरूर उठापटक होता है। जबकि दूसरी तरफ महिलाओं की संख्या सिर्फ 19 फीसदी ही है। सेक्स करने से भी ज्यादा जरूरी काम क्या है.. सेक्स करने से भी ज्यादा जरूरी काम क्या हो सकता है यह एक सोचने लायक बात है। लेकिन कंज्यूमर रिपोर्ट के मुताबिक 53 फीसदी लोग नींद और ज्यादा थकान की वजह से सेक्स करने से मना कर देते हैं। इसके उपरांत तबियत खराब...

नारी देह, नग्नता और हमारा समाज

संवादघर  ( www.samwaadghar.blogspot.com)  में   नारी की दैहिक स्वतंत्रता व सामाजिक उपयोगिता पर जो बहस चल रही है वह रोचक तो है ही ,  बहुत महत्वपूर्ण भी है । एक ऐसा एंगिल जिससे अभी तक किसी ने इस विषय पर बात नहीं की है ,  मैं सुधी पाठकों के सम्मुख रख रहा हूं  !   बहस को और उलझाने के लिये नहीं बल्कि सुलझाने में मदद हो सके इसलिये  !  नारी देह के डि - सैक्सुअलाइज़ेशन  (de-sexualization)  की दो स्थिति हो सकती हैं ।    पहली स्थिति है  -  जहरीला फल चखने से पहले वाले आदम और हव्वा की  - जो यौन भावना से पूर्णतः अपरिचित थे और शिशुओं की सी पवित्रता से ईडन गार्डन में रहते थे।    ऐसा एक ही स्थिति में संभव है  -  जो भी शिशु इस दुनिया में आये    उसे ऐसे लोक में छोड़ दिया जाये जो ईडन गार्डन के ही समकक्ष हो । वहां यौनभावना का नामो - निशां भी न हो ।   " धीरे धीरे इस दुनिया से भी यौनभावना को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना है " -  यह भी लक्ष्य हमें अपने सामने रखना होगा ।   यदि यह संभव नहीं है या    हम इसके लिये तैयार नहीं हैं तो दूसरी स्थिति ये हो सकती है कि हम न्यूडिस्ट समाज की ओर बढ़ें और ठीक वैसे ...