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एक मासूम लड़की का आखिरी ख़त अपने माँ के नाम...उसने क्या क्या नहीं सहा आखिर एड्स ने उसकी जिंदगी तबाह कर दी और बह 12th पास नहीं कर पायी

आज आप लोगों को एक बात बता दूं की की जिस लड़की ने कल आत्महत्या की उससे मैं बहुत प्यार करता था लेकिन वो मुझे नहीं मैंने उसे एक बार बताया की मैं उससे प्यार करता हूँ तो उसने इनकार कर दिया क्योंकि बह तब सिर्फ 16 साल की थी और पड़ने वाली थी ! मैं उसे भूल चुका था लेकिन कल जब यह खबर मेरे कानों मे पड़ी तो दिल रो पड़ा और सोचने पर मजबूर हो गया की बह लड़की ऐसा कर सकती है और क्या इतना कुछ उसके साथ हो सकता है जिसकी दुनिया सिर्फ किताबो तक थी! इतनी छोटी सी उम्र मे इतना बड़ा कदम,आखिर क्या हो रहा है यह !ये सवाल हर बच्चे से जो अपने सपनो की चाहत मे अपने माता-पिता का दिल और उनके अरमानो को चूर-चूर करते नजर आ रहे है !!ये ही बारदात को पेश करती हिन्दुस्तान का दर्द की एक ख़ास रिपोर्ट!! ऐसी ही लड़की का एक आखिरी ख़त अपनी माँ के नाम माँ................ माँ मैं आपसे और पापा से बहुत प्यार करती हूँ और आप लोगों को छोड़कर जाने का दिल भी नहीं करता पर क्या करूँ हालत ही कुछ ऐसे हो गए है की मुझे जाना पड़ेगा !माँ मैंने आपसे एक बात छुपायी थी जो अब बताने जा रही हूँ ,वो ये की माँ मैं एक लड़के से बहुत प्यार करती थी ,और मुझे लगता था ...

फिर आ सकता है हिंद्स्तान पर खतरा , फिर बह सकती है खून की नदिया...अबकी बार जो हमला होगा बह इससे भी भयानक हो सकता है एक रपट

फिर आ सकता है हिंद्स्तान पर खतरा , फिर बह सकती है खून की नदिया...अबकी बार जो हमला होगा बह इससे भी भयानक हो सकता है एक रपट देश में आतंकी हमलों का खतरा अभी टला नहीं है। अगर सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो अगले महीने की 13 तारीख को देश में एक बार फिर आतंकी हमला हो सकता है। यह आशंका मई से नवंबर तक हुए हमलों के विश्लेषण के आधार पर जताई जा रही है। मुंबई क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी ने यह आशंका जताते हुए कहा कि बीते छह माह में आतंकियों ने कई हमले किए हैं। इनमें यह खास बात रही कि हर हमला पहले हमले के एक माह बीतने के बाद और खास चिन्हित तारीखों पर किया गया। अब तक ये तारीखें 13 या 26 रही हैं। इसी आधार पर आशंका जताई जा रही है कि अगला आतंकी हमला 13 जनवरी 2009 को हो सकता है। अगर एक बार फिर जानकारी होते हुए भी पुलिस सोती रही तो इसे हम क्या समझेंगे हिन्दुस्तान की सेना से आग्रह है की सुरक्षा बरते और मासूमों की जान से खिलवाड़ न करे !~
मां को एक पत्र -संजय सेन सागर तुम मेरे लिए वो सूरज हो जिसका रोशनी में मैं चला हूँ ,माँ तुम मेरे लिए वो धरती हो जिसमें मै पला हूँ। माँ मैं तुम्हारे कदमों के निशां पर चलकर आगे बढ़ा हूँ। माँ मैने देखें है हमारी जरा सी खुशी के लिए आपके गिरते आंसू , हमारी जरा सी ठंडक के लिए आपका गिरता पसीना। माँ तुमने ही बनाया है इस मकां को घर । माँ मैनें आपके आँचल के तले ही मनाई है होली और दीवाली। माँ तुम्हें तो वो याद ही होगा जब तुम बीमार हो जाती थी और अपने इलाज की जगह मुझे खिलौने दिलाती थी । मैं नादान था खुश हो जाता था ।पर तुम्हारे आंसुओं से भीगे तकिये मुझे हर सुबह मिलते थे। माँ तुमने ही सिखाया था ना मुझे हर वक्त सच बोलना फिर मेरी खुशी के लिए क्यों झूठ बोल देती थी तुम। माँ तुम सत्य की वो मूरत हो जिसने झूठ को ख्वाबों में भी हराया है। माँ तुमने ही बनाया है मेरे अस्तित्व को। तुमने ही सिखाया है उंगली थामकर मुझे चलना। तेरे बलिदान और त्याग के कारण ही तुझे भगवान का रूप कहा जाता ,मैने कभी भगवान को नही देखा पर मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूँ की बह तेरी ही परछाई होगी। आखिर कहां से लाती हो माँ तुम इतना सामर्थ्य और...