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Showing posts with the label संजीव वर्मा 'सलिल'

दोहा सलिला

ओशो चिंतन: घाट भुलाना 4 * शिष्य बने कोई अगर, है उसका अधिकार। गुरु न बनूँ मैं, है मुझे,  केवल यह स्वीकार।। * पंगु करें गुरु; शिष्य का, लेकर खुद पर भार। अपना बोझा कम नहीं, क्यों लूँ और ...

अश'आर - आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

बेताब है सूरज सवेरा कब होगा? इठलाती उषा आयेगी वो तब होगा। जो रहा बेताब वो आगे बढ़ा है। जो नहीं बेताब वो पीछे खड़ा है। उठी चिलमन तो देखा हम रहे जिनके लिए बेताब। चिलमन में छिपे वो भी हमारे लिए बेताब।