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पुण्यतिथि:राजीव गाँधी,कुछ यादें जेहन में बाकी है

एक  नमन  राजीव  जी  को  आज उनकी  पुण्यतिथि के    अवसर पर.राजीव जी बचपन से हमारे प्रिय नेता रहे आज भी याद है कि इंदिरा जी के निधन के समय हम सभी कैसे चाह रहे थे कि राजीव जी आयें और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठ जाएँ क्योंकि ये बच्चों की समझ थी कि जो जल्दी से आकर कुर्सी पर बैठ जायेगा वही प्रधानमंत्री हो जायेगा.तब हमारे दिमाग की क्या कहें वह तो उनके व्यक्तित्व पर ही मोहित था जो एक शायर के शब्दों में यूँ था-                     ''लताफत राजीव गाँधी,नफासत राजीव गाँधी ,                      थे सिर से कदम तक एक शराफत राजीव गाँधी ,                      नज़र आते थे कितने खूबसूरत राजीव गाँधी.'' राजीव जी का  जन्म २० अगस्त १९४४ को हुआ था और राजनीति से कोसों दूर रहने वाले राजीव जी अपनी माता श्रीमती इंदिरा जी के  कारण राजनीति में  आये और देश को प...

ये वंशवाद नहीं है क्या?

ये वंशवाद नहीं है क्या?                उत्तर  प्रदेश में नयी सरकार  का गठन जोरों पर है .सपा ने बहुमत हासिल किया और सबकी जुबान पर एक ही नाम चढ़ गया माननीय मुख्यमंत्री पद के लिए और वह नाम है ''अखिलेश यादव''.जबकि चुनाव के दौरान अखिलेश स्वयं लगातार माननीय नेताजी शब्द का उच्चारण इस पद के लिए करते रहे  जिसमे साफ साफ यही दिखाई दे रहा था कि उनका इशारा कभी अपने पिताजी तो कभी अपनी ओर है  क्योंकि माननीय नेताजी तो कोई भी हो सकते हैं पिता हो या पुत्र और फिर यहाँ तो कहीं भी वंशवाद की  छायामात्र    भी नहीं है दोनों ही राजनीतिज्ञ हैं और दोनों ही इस पद के योग्य भी .वे इस बारे में भले  ही कोई बात कहें  कहने के अधिकारी भी हैं और फिर उन्हें भारतीय माता की संतान  होने  के कारण भारतीय मीडिया ने बोलने  का हक़ भी दिया है किन्तु कहाँ  है वह मीडिया जो नेहरु-गाँधी परिवार  के बच्चों  के राजनीति में आने पर जोर जोर से ''वंशवाद ''के खिलाफ बोलने लगता है क्या यहाँ उन्हें वंशवाद की झलक नहीं दि...

राज्यों को और अधिक शक्तियां एवं संसाधन सौंपने से राष्ट्र की उन्नति तीव्र गति से होगी

राज्यों को और अधिक शक्तियां एवं संसाधन  सौंपने से राष्ट्र की उन्नति तीव्र गति से होगी  केंद्र तथा राज्यों में शक्तियों का वितरण एक ऐसी विशेषता है जो संघात्मक संविधानों में प्रमुख है .प्रो.के.सी.व्हव्हियर के अनुसार -,''संघात्मक सिद्धांत से तात्पर्य है ,संघ व् राज्यों में शक्तियों का वितरण ऐसी रीति से किया जाये कि दोनों अपने अपने क्षेत्र में स्वतंत्र हों ,किन्तु एक दूसरे के सहयोगी भी हों.''इसका तात्पर्य यह है कि राज्यों को कुछ सीमा तक स्वायत्ता होनी चाहिए .अमेरिकन संविधान संघात्मक संविधानों का जन्म दाता है उसमे केंद्र की शक्तियां परिभाषित की गयी है ,राज्यों की नहीं  .अमेरिकन संविधान में अवशिष्ट शक्तियां राज्यों में निहित की गयी हैं .परिणाम स्वरुप राज्य अधिक शक्तिशाली थे ;किन्तु कालांतर में आवश्यकता पड़ने पर केंद्र की शक्तियां बढती गयी और राज्यों की स्वायत्ता का ह्रास होता गया वर्तमान में स्थिति यह है कि  राज्यों की स्वायत्ता नाम मात्र की रह गयी है.       भारतीय संविधान में केंद्र और राज्यों के बीच शक्तियों के वितरण की जो योजना...

हम कौन थे?क्या हो गए?और क्या होंगे अभी?...............

हम कौन थे?क्या हो गए?और क्या होंगे अभी?............... आओ विचारें आज मिलकर ये समस्याएं सभी.                  आज कुछ ब्लोग्स पर ''शिखा कौशिक जी''द्वारा प्रस्तुत आलेख ''ब्लोगर सम्मान परंपरा का ढकोसला बंद कीजिए''चर्चा में है और विभिन्न ब्लोगर में से कोई इससे सहमत है तो कोई असहमत.चलिए वो तो कोई बात नहीं क्योंकि ये तो कहा ही गया है कि जहाँ बुद्धिजीवी वर्ग होगा वहां तीन राय बनेंगी सहमति ,असहमति और अनिर्णय की किन्तु सबसे ज्यादा उल्लेखनीय टिप्पणियां ''दीपक मशाल जी ''की और ''डॉ.रूप चन्द्र शास्त्री जी ''की रही .एक और दीपक जी पुरुस्कृत सभी ब्लोगर्स का पक्ष लेते हैं जबकि शिखा जी द्वारा किसी भी ब्लोगर पर कोई आक्षेप किया ही नहीं गया है उनका आक्षेप केवल चयन प्रक्रिया पर है तो दूसरी और डॉ.रूप चन्द्र शास्त्री जी ''खट्टा मीठा तीखा पचाने की सलाह देते हैं भूल जातेहै कि ''जो डर गया वो मर गया'' की उक्ति आजकल के नए ब्लोगर्स के सर चढ़कर बोल रही है.दोनों में से कोई भी आलेख के मर्म तक नहीं पहुँचता जिसका साफ साफ कहना है कि पह...

ब्लोगर सम्मान परम्परा का ढकोसला बंद कीजिये !''

' इस आलेख का जन्म वर्तमान में ब्लोगिंग जगत में चल रही ''ब्लोगर सम्मान समारोह परम्परा 'के प्रति मेरे मस्तिष्क में चल रही उधेड़-बुन से हुआ .सम्मान पाना सभी चाहते हैं और इसमें कोई बुराई भी नहीं है किन्तु ब्लॉग-जगत में जो भी सम्मान प्रदान किये गए उनका आधार क्या है ?इसकी कोई ठोस जानकारी तथाकथित सम्मान सम्मलेन आयोजित करने वालों ने अंतर्जाल पर नहीं डाली.आखिर क्या हैं ये आधार - १-क्या किसी ब्लॉग के समर्थकों के आधार पर उसे सर्वश्रेठ ब्लोगर चुना जाता है ? २-क्या ब्लॉग पर आने वाली टिप्पन्नियों की संख्या के आधार पर सर्वश्रेठ ब्लोगर का चुनाव होता है ? ३-आप किन ब्लोग्स को किस आधार पर सम्मान प्रदान करने हेतु विश्लेषण के लिए चुनते हैं? ४-नन्हे ब्लोगर का चयन किस आधार पर करते हैं जबकि सभी जानते हैं की नन्हे ब्लोगर स्वयं ब्लोग्स पर पोस्ट नहीं डालते उनके माता-पिता ही ये काम करते हैं ? ५-किसी बलोगर की टिपण्णी और ब्लोगर्स से श्रेठ है इसका क्या आधार है ? ६-ऐसा क्या खास है सम्मान पाने वाले ब्लोगर में जो उसे अन्य ब्लोगर से श्रेष्ठ  बनता है ?क्या उसकी लेखन क्षमता अन्य ब्लोगर्स से श...