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Showing posts with the label स्वच्छ सन्देश

जिसने नमाज़ तर्क की !

जिसने  फज्र की नमाज़ तर्क की उस  के चेहरे से नूर ख़त्म कर दी जाती है  जिसने जुहर की नमाज़ तर्क की उस की रोज़ी बरकत  ख़त्म कर दी जाती है  जिसने  असर  की  नमाज़ तर्क की उस के जिस्म से ताक़त  ख़त्म कर दी जाती है  जिसने मग़रिब की नमाज़ तर्क की उसको औलाद से कोई  ख़ुशी नसीब न होगी  जिसने ईशा की नमाज़ तर्क की उस की नींद से राहत  ख़त्म कर दी जाती है 

सलीम ख़ान के पत्रकार भाई समीउद्दीन नीलू (यू पी पुलिस द्वारा उत्पीड़ित) को मानवअधिकार आयोग से राहत, यू पी सरकार को ५ लाख मुआवजा देने का निर्देश

बचपन से सुना करते थे कि ऊपर वाले के यहाँ देर है अंधेर नहीं ! लेकिन देश के मौजूदा सड़े हुए तंत्र में जिस तरह से आम जनता का भरोसा उठ गया है वह भी एक गंभीर समस्या ही है. समीउद्दीन नीलू उत्तर प्रदेश के लखीमपुर ज़िले में विगत एक दशक से ज़्यादा समय से हिंदी दैनिक समाचार पत्र अमर उजाला में बतौर संवाददाता अपनी सेवा कर रहें हैं. शीर्षकान्तर न हो इसलिए मैं यह बताना चाहूँगा कि कैसे मेरे भाई को यूपी की बल्कि लखीमपुर-खीरी की एस पी 'पद्मजा' ने अपने सरकारी पॉवर का दुरुपयोग करते हुए मानवता के क्रूरतम, तंत्र के दुष्टतम कृत्य को मात्र अपने गलत व समाज विरोधी कार्यों को छिपने के उद्देश्य से, जान से मारने की कोशिश (एनकाउन्टर) की और अपने नीचे कार्य करने आले पुलिस वालों की सहायता के ज़रिये उन्हें वन्य जीव अधिनियम के केस में फ़र्ज़ी तरीक़े से जेल भिजवा दिया. लेकिन कहते हैं कि सांच को आंच नहीं, बस कुछ ऐसा ही हुआ. लखनऊ मंडल और बरेली मंडल में वकीलों, किसानों, मजदूरों, पत्रकारों और हाकरों द्वारा किये गए जन-आन्दोलन के चलते प्रशासन के बालों में जूं रेंगी और उन्हें लगभग 9 दिन जेल में रहने के बाद ...

ब्लोगिंग ने प्रकाशन के पारंपरिक माध्यम के एकाधिकार में सेंध सी लगा दी है! Monopoly of Publishers and Blogging !

ब्लोगिंग वर्तमान में अंतर्जाल पर सबसे जयादा पसंद किया जाने वाला एक संवाद-स्थल है, यही नहीं इसके माध्यम से  वे लोग जयादा लाभान्वित हो रहे हैं जो लेखक, रचनाकार आदि बनने के सपने तो देखते हैं  और लिखते भी हैं लेकिन उनको प्रकाशित करवाने में उन्हें लाले आ जाते हैं. ब्लोगिंग ने प्रकाशन के पारंपरिक माध्यम के एकाधिकार  में सेंध सी लगा दी है . लेकिन ब्लॉग पर लिखते वक़्त कुछ चीज़ें अगर ध्यान में रखीं जाएँ तो आपकी पोस्ट अच्छी ही नहीं बहुत अच्छी हो सकती है और पोस्ट की सबसे बड़ी ख़ूबी तो यही है कि उसे पाठक शुरू से आखिर तक पढ़ डाले और पाठक इतना सम्मोहित हो जाये कि वह जब तक पूरा का पूरा पढ़ न ले, उसे चैन न आये और क्या ही खूब हो कि पाठक आदि से अंत तक उसे पढ़ भी ले और टिपण्णी करने पर मजबूर हो जाये. ज़्यादातर होता यूँ है कि ब्लोगर बंधू चिट्ठे पर जाते है और पोस्ट ओपन भी करते हैं लेकिन उस पोस्ट को पढ़ते नहीं है और सिर्फ शीर्षक पढ़ कर ही अपनी टिपण्णी कर देते हैं या ...

इस्लाम व विश्व की अन्य सभ्यताओं में नारी की स्थिति की तुलना Compersion Between Islam & Other Civilization

" भूतकाल में स्त्रियों का अपमान किया जाता था और और उनका प्रयोग केवल काम वासना के लिए किया जाता था | " इतिहास से लिए निम्न उदहारण इस तथ्य की पूर्ण व्याख्या करते हैं कि पूर्व की सभ्यता में औरतों का स्थान इस क़दर गिरा हुआ था कि उनको प्राथमिक मानव सम्मान भी नहीं दिया गया था - बेबीलोन सभ्यता औरतें अपमानित की जातीं और बेबिलोनिया के कानून में उनको हक और अधिकार से वंचित रखा जाता था | यदि कोई व्यक्ति किसी औरत की हत्या कर देता था तो उसको दंड देने के बजाये उसकी पत्नी को मौत के घाट उतार दिया जाता था | यूनानी सभ्यता इस सभ्यता को प्राचीन सभ्यताओं में अत्यंत श्रेष्ट माना जाता है| इस 'अत्यंत श्रेष्ट' व्यवस्था के अनुसार औरतों को सभी अधिकारों से वंचित रखा जाता था और वे नीच वस्तु के रूप में देखी जाती थी | यूनानी देवगाथा में 'पान्डोरा' नाम की एक काल्पनिक स्त्री पूरी मानवजाति के दुखों की जड़ मानी जाती है | यूनानी लोग स्त्रियों को पुरुषों के मुकाबले तुच्छ मानते थे | हालाँकि उनकी पवित्रता अमूल्य थी और उनका सम्मान किया जाता था, लेकिन बाद में यूनानी लोग अंहकार और काम वासना मे...

सचमुच मुस्लिम धोखेबाज़ होते हैं (Muslims are really insidious) !!!???

मैंने दो दिन पहले एक लेख पोस्ट करी थी जिसके मज़मून का इरादा यह था कि क्या मुसलमान धोखेबाज़ होते हैं? जैसा कि आजकल मिडिया और इस्लाम के आलोचक यह प्रोपगैंडा फैला रहें हैं . वह कुछ ऐसा ही करते जा रहें हैं कि इस्लाम ही है जो दुनिया के लिए खतरा है, यह जाने बिना यह समझे बिना हालाँकि सबसे मज़ेदार बात तो यह है कि वे सब इस्लाम का विरोध इसलिए तो कतई भी नहीं करते उन्हें इस्लाम के बारे में मालूमात नहीं है बल्कि इसलिए कि पश्चिम देश (जो कि इस्लाम के दुश्मन हैं) के अन्धानुकरण के चलते विरोध करते हैं, आज देश में जैसा माहौल है और जिस तरह से अमेरिका और यूरोप आदि का अन्धानुकरण चल रहा है, ऐसा लगने लगा है कि हम भारतीय अपनी संस्कृति को भूलते ही जा रहे हैं और यह सब उन लोगों की साजिश के तहत होता जा रहा है. पूरी तरह से पश्चिमी सभ्यता को आत्मसात करने की जो होड़ लगी है, उससे निजात कैसे मिले? उसे कैसे ख़त्म किया जाये? उसे कैसे रोका जाये? मुझे लगता है कि भारत में मुस्लिम ही ऐसे हैं जो अब पश्चिम की भ्रष्ट सांस्कृतिक आक्रमण के खिलाफ बोल रहें हैं और उससे अभी तक बचे हुए हैं. वरना बाक़ी भारतीय (जो गैर-मुस्लिम हैं) अमेरि...

समलैंगिकता ईश्वर के क़ानून के खिलाफ़ है (Homosexuality is against God’s Constitution)

बीते गुरुवार (यौमुल खमीस) को दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश एपी शाह और न्यायधीश एस मुरलीधर की पीठ ने यह फ़ैसला सुना दिया कि समलैंगिकता अब अपराध नहीं और आपसी सहमती से इस प्रकार के बनाये गए सम्बन्ध में कोई बात गैर-क़ानूनी नहीं. (कु)तर्क यह था न्यायधीशों का कि "भेदभाव समानता के खिलाफ़ है और यह फ़ैसला समानता को मान्यता देता है जो हर व्यक्ति को एक गरिमा प्रदान करेगा". कोर्ट के इस फ़ैसले पर जिस प्रकार से नकारात्मक प्रतिक्रियाएं आईं वह लाज़मी थी. वैसे एक बात मुझे पहली बार अच्छी लगी कि भारत की दो बड़ी कौमें हिन्दू व मुसलमानों ने एक जुट हो कर इस फैसले का विरोध किया (मेरा मानना है कि अगर इसी तरह अमेरिका और पश्चिम का अन्धानुकरण को साथ मिलकर नकारा जाता रहा तो वह दिन दूर नहीं कि भारत जल्द ही विश्वशक्ति बन जायेगा). भाजपा के एक बड़े नेता मुरली मनोहर जोशी का बयान काबिले तारीफ रहा, उन्होंने कहा कि न्यायपालिका से बड़ी संसद है अर्थात संसद न्यायपालिका से उपर है. सिर्फ एक या दो न्यायधीश (शायेद वह समलैंगिक ही हों) सब कुछ तय नहीं कर सकते हैं. बाबा रामदेव ने कहा कि इस प्रकार तो कुल ही नष्ट हो जाय...

बलात्कारियों को मौत की सज़ा !

इस्लामी क़ानून में बलात्कार की सज़ा मौत है बहुत से लोग इसे निर्दयता कह कर इस दंड पर आश्चर्य प्रकट करते हैं| कुछ का तो कहना है कि इस्लाम एक जंगली धर्म है | मैंने उन जैसे कई व्यक्तियों से एक सवाल पूछा था - सीधा और सरल | कोई आपकी माँ या बहन के साथ बलात्कार करता है और आपको न्यायधीश बना दिया जाये और बलात्कारी को सामने लाया जाये तो उस दोषी को आप कौन सी सज़ा सुनाएँगे ? मुझे प्रत्येक से एक ही जवाब सुनने को मिला- उसे मृत्यु दंड दिया जाये | कुछ ने कहा कि उसे कष्ट दे दे कर मारना चाहिए | मेरा अगला प्रश्न था अगर कोई व्यक्ति आपकी माँ, पत्नी अथवा बहन के साथ बलात्कार करता है तो आप उसे मृत्यु दंड देना चाहते हैं लेकिन यही घटना किसी और कि माँ, पत्नी या बहन के साथ होती है तो आप कहते हैं मृत्युदंड देना जंगलीपन है| इस स्तिथि में यह दोहरा मापदंड क्यूँ? पश्चिमी समाज औरतों को ऊपर उठाने का झूठा दावा करता है औरतों की आज़ादी का पश्चिमी दावा एक ढोंग है, जिनके सहारे वो उनके शरीर का शोषण करते हैं, उनकी आत्मा को गंदा करते हैं और उनके मान सम्मान को उनसे वंचित रखते हैं | पश्चिमी समाज दावा करता है की उसने औरतों को ऊप...

देशी तालिबानी फतवाः गर्ल्स कॉलेजों में नो जींस-नो मोबाइल

लखनऊ. उत्तरप्रदेश डिग्री कॉलेजों के प्रधानाचार्यो की एशोसिएशन ने आज सोमवार को एक बड़ा फैसला करते हुए आगामी 1 जुलाई से शुरु होने वाले सत्र के लिए कॉलेजों में लड़कियों के लिए नया ड्रेस कोड लागू कर दिया है। इस ड्रेस कोड के अनुसार अब कोई भी लड़की कॉलेज में जींस - टी शर्ट पहनकर नहीं आ सकती है तथा अपने साथ मोबाइल फोन भी कॉलेज में नहीं ला सकती है।सभी सरकारी डिग्री कॉलेजो को इस नियम का पालन करना होगा उत्तरप्रदेश डिग्री कॉलेजों के प्रधानाचार्यो के इस नए फैसले को सभी सरकारी डिग्री कॉलेजो में लागू किया जाएगा।क्यों लिया यह फैसलाप्रधानाचार्यो की संस्था ने कहा कि चूंकि प्रदेश में लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं लगातार बढ़ रहीं है इसलिए यह फैसला लिया गया है।गौरतलब है कि कुछ समय पहले कानपुर के कुछ कॉलेजों ने भी इसी तरह का फैसला लेते हुए लड़कियों के लिए ड्रेस कोड लागू करते हुए जींस और टी शर्ट पहनने पर रोक लगा दिया था। क्या लड़कियों के साथ होने वाली छेड़खानी की घटनाओं में उनकी वेशभूषा से फर्क पड़ता है? क्या जींस - टी शर्ट पहनने वाली लड़कियां सलवार शूट पहनने वाली लड़कियों की अपेक्षा छेड़खानी की ज्यादा...

Mohalle men Musalmanon ke liye koi jagah nahin !

अख़बार "अमन के सिपाही" में स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ का लेख छपा

अख़बार "अमन के सिपाही" में स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ का लेख छपा (अख़बार "अमन के सिपाही" में स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ का लेख छपा) कैराना के 'अमन के सिपाही' में स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़ का लेख " अल्लाह गणित नहीं जानता है " 30 मई 2009 को छपा. लेख छापने के लिए मैं 'अमन के सिपाही' संपादक महोदय का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ.   सलीम खान  संरक्षक   स्वच्छ सन्देश: हिन्दोस्तान की आवाज़  लखनऊ, उत्तर प्रदेश