दोहाः मेरे पति की मात हे सदा करव कल्याण.. तुम्हरी सेवा में न कमी रहू हरदम रखूं ध्यान// जय जय जय सासू महरानी हरदम बोलो मीठी वाणी. तुम्हरी हरदम करवय सेवा फल पकवान खिलाउब मेवा// हम पर ज्यादा करो न रोष हम तुमका देवय न दोष. तुम्हरी बेटी जैसी लागी तुम्हारी सेवा म हम जागी// रूखा-सूखा मिल के खाबय करय सिकायत कहू न जावय पति देव खुश रहे हमेशा उनके तन न रहे क्लेशा. इतना वादा कय लिया माई फिर केथऊ कय चिंता नाही// जीवन अपना चम-चम चमके फूल हमरे आंगन म गमके. जैसी करनी वैसी भरनी तुम जानत हो मेरी जननी// संस्कार कय रूप अनोखा कभौ न होय हमसे धोखा. हसी खुशी जिनगी बीत जाये सुख दुख तो हरदम आये// दोहाः रोग दोष न लगे ई तन मा.जाता रहे कलेश सासू मॉ की सेवा जो करे खुशी रहे महेश.. बोलो सासू माता की जै,,