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हाइकु गजल : संजीव 'सलिल'

आया वसंत, / इन्द्रधनुषी हुए / दिशा-दिगंत.. शोभा अनंत / हुए मोहित, सुर / मानव संत.. * प्रीत के गीत / गुनगुनाती धूप / बनालो मीत. जलाते दिए / एक-दूजे के लिए / कामिनी-कंत.. * पीताभी पर्ण / संभावित जननी / जैसे विवर्ण.. हो हरियाली / मिलेगी खुशहाली / होगे श्रीमंत.. * चूमता कली / मधुकर गुंजार / लजाती लली.. सूरज हुआ / उषा पर निसार / लाली अनंत.. * प्रीत की रीत / जानकार न जाने / नीत-अनीत. क्यों कन्यादान? / 'सलिल' वरदान / दें एकदंत.. **********************