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Showing posts with the label बच्चे

ऐसे बदलें शिक्षा का चेहरा

हमारे यहां बच्चों की बढ़ती संख्या के अनुपात में अच्छे स्कूलों का नितांत अभाव है। एक अनुमान के अनुसार यदि छात्र-शिक्षक अनुपात को संतोषजनक स्तर पर बरकरार रखना है तो हमें कम से कम तीन गुना अधिक स्कूल चाहिए। इसमें कोई दो राय नहीं है कि सरकार के पास इतना पैसा नहीं है कि वह सभी स्कूलों को वित्तीय सहायता दे सके। स्कूलों को वित्तीय दृष्टि से स्वयं सक्षम होना होगा। केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल भी हमारे प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के नक्शेकदम पर चल रहे हैं। सिब्बल के पास नेहरू के जैसा ही विजन है, नेहरू के समान ही एक सपना है। लेकिन दुर्भाग्य से नेहरू के समान ही सिब्बल भी प्राथमिक शिक्षा की तुलना में उच्च शिक्षा को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। सवाल है कि दस साल की सड़ी-गली शिक्षा से जो नुकसान हो चुका होगा, क्या उसकी खानापूर्ति चार-पांच साल की कॉलेज शिक्षा से की जा सकती है? विभिन्न अध्ययनों व सर्वे से एक बात सामने आई है कि बिहार के प्राथमिक स्कूलों के बच्चों का प्रदर्शन महाराष्ट्र, गुजरात या मध्यप्रदेश के स्कूली बच्चों से बेहतर रहा है। इसकी एक वजह यह हो सकती...

शिक्षक ,अभिवाभाक , बच्चे ---त्रिकोण ? एक व्यर्थ की बहस-

५ सितम्बर , शिक्षक दिवस पर हर जगह ,टीवी,अखवार,गोष्ठियों में --इस त्रिको ण पर बहस होरही है ; मेरी समझ से यह बाहर की बात है की आख़िर इन तीन महत्वपूर्ण -व्यक्तित्वों को त्रिकोण पर क्यों हो ना चाहिए ? तीनों को एक बिन्दु पर रक्खकर क्यों नहीं देखा जाता? बहस का तो कोई मुद्दा ही नहीं है । अधिकार कर्तव्यों के समुचित निभाने पर मिलते हैं , बच्चों को अभी अपने कर्तव्यों का ही नहीं पता , अभी किसी कार्य के लिए सक्षम नहीं , तो उनके अधिकार कहाँ से आए ? यह पश्चिमी -रिवाज़ है जो बच्चों को स्कूल में पिस्टल व गोली लाने व साथियों पर चलाने को प्रेरित करता है| पिताव शिक्षक पर मुकदमा को प्रेरित करता है।उन्हें अधिकार नहीं अच्छा मनुष्य बनने के लिए उचित शिक्षा ग्रहण करने दीजिये ,कराइए । हर वर्ष की भांति रटी-रटाई बातें,शिक्षक,पेरेंट्स के कर्तव्य व बच्चों के अधिकारों पर बहस से कुछ नहीं होगा । वस्तुतः होना यह चाहिए --- १-शिक्षक,अभिवावकों ,बच्चों को कर्तव्य,अधिकार आदि रटाने की बजाय , सभी को सिर्फ़ अच्छा इंसान बनाना चाहिए बाकी सारा काम स्वयं ही होजायगा। २--५ वर...

अनुशासन हीन क्यों है पीढी ????

उछाले गये प्रश्न,  अनुशासन हीन क्यों है आ्ज की पीढी ? क्यों हें दूरियां,द्वन्द्व,अन्तर्द्वन्द्व- बच्चों व माता पिता में ? चुनते रहे पत्तियां, बच्चों पर हैं बडे दबाव,पढाई के ,ट्यूशन के, मां-बाप की आकान्क्षाओं के । ब्च्चों से सीखें मां- बाप, बच्चों को गुरू मानकर। ्बच्चों को सिर्फ़ पैसे सुविधा नहीं, अपना समय भी दें,मित्र बनें,पूरी बात सुनें ,समझें । बच्चे भी मां बाप की सुनने की बजाय , अपनी ही तानते हैं; ्टीचर व दोस्तों कि अधिक मानते हैं, टी. वी.,सिनेमा,इन्टर्नेट को अधिक पहचानते हैं । कौन जा पाया जड में -- आरहा है देश में, अवान्छित धन, योरोप,अमेरिका के जुआघरों, चकलाघरों,नन्गे नाच के क्लबों, आतन्क्बाद्व व ् निरीहों पर अत्याचार व- शस्त्रों की होड के पोषण के लिये, हथियारों की बिक्री की कमाई का । कभी बिकास के नाम पर,सहायता व कर्ज़, एवम एन.जी.ओ. प्रोजेक्ट या-- बहुराश्ट्रीय कम्पनियों ्के बिकास में लिप्त- हमें, मोटी-मोटी आमदनी, पे-पर्क्स, के रूप में । ""जैसा खायें अन्न, वैसा होगा मन। ""

वीकएंड टाइमपास...

देश फिलहाल बड़ी-बड़ी चिंताओं से घिरा है। कहीं चुनावी घोषणा पत्र जारी हो रहे हैं, आईपीएल साउथ अफ्रीका चला गया है, अक्षय कुमार पर केस चल रहा है...... यानि सबकी अपनी अपनी चिंताएं हैं...इन चिंताओ के बीच इन नन्हे मुन्नो के टेंशन को देखिए, शायद एक पल को आप का तनाव दूर हो जाए। भास्कर डॉट कॉम के व्यूअर्स ने हमें भेजा है नन्हें मुन्नों का एक चटपटा सा चित्र ... हमनें सोचा वीकएंड पर इसे आपके साथ शेयर करें। आगे पढ़ें के आगे यहाँ

किस मुंह से धोनी के पास जाओगे…

हरीश चंद्र बर्णवाल क हते हैं टीम इंडिया में एक से बढ़कर एक हीरा है। कहते हैं इस समय की इंडियन क्रिकेट टीम देश की सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट टीम है। कहते हैं भारतीय क्रिकेट का बैटिंग लाइनअप इससे बढ़िया कभी नहीं रहा। बॉलिंग में भी ऐसी वैरायटी कभी नहीं रही। ये टीम दुनिया की किसी भी टीम का कहीं भी मुकाबला कर सकती है। इस टीम में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट में जीतते रहने का हुनर है। इसे सिर्फ जीतना आता है। हारना तो बस समझ लीजिए कि जब ये टीम चाहेगी तभी हारेगी। पर ये क्या...? नेपियर में तो पूरी टीम ही नप गई! क्या बैटिंग, क्या बॉलिंग और क्या फील्डिंग, हर मोर्चे पर इतना लिजलिजापन! क्या हो गया टीम इंडिया को?वही सचिन, वही सहवाग, वही लक्ष्मण, द्रविड़, विस्फोटक युवराज भी हैं। मगर सबके सब तीन सौ तक पहुंचते-पहुंचते ही निपट गए। ये भी न सोचा कि कीवियों ने रनों का पहाड़... आगे पढ़ें के आगे यहाँ

कितने पाकिस्तान

पंकज श्रीवास्तव एसोसिएट एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर जिनके पास सामान्य ज्ञान बढ़ाने का एकमात्र जरिया समाचार चैनल रह गए हैं, उनका हैरान होना लाजिमी है। उन्हें समझ में नहीं आ रहा कि ये कैसा पाकिस्तान है। सड़कों पर लाखों की भीड़। हवा में जम्हूरियत और आजादी के तराने। स्वात में शरिया लागू होने की गरमा-गरम खबरों की बीच अचानक आजाद न्यायप्रणाली के पक्ष में ये तूफान कैसे उठ गया! बिना खड्ग-बिना ढाल, बस जुल्फें लहराकर काले कोट वालों ने ये कैसा कमाल कर दिया। सेना खामोश रही। पुलिस भी कभी-कभार ही चिंहुकी...और इफ्तेखार चौधरी चीफ जस्टिस के पद पर बहाल हो गए! पाकिस्तान के इतिहास को देखते हुए ये वाकई चमत्कार से कम नहीं। आम भारतीयों को इस आंदोलन की कामयाबी की जरा भी उम्मीद नहीं थी। सबको लग रहा था कि लॉंग मार्च बीच में ही दम तोड़ देगा। जरदारी जब चाहेंगे आंदोलनकारियों को जेल में ठूंस देंगे। 16 मार्च को इस्लामाबाद पहुंचना नामुमकिन होगा। ये भी बताया जा रहा था कि लांग मार्च में तालिबानी घुस आए हैं। कभी भी धमाका हो सकता है। लॉंग मार्च में मानव बम वाली खबर भी अरसे तक चीखती रही। लेकिन गिद्दों की उम्मीद पूरी नहीं हुई। ...

हिन्दी ब्लॉग्गिंग किसके लिए hai?

आज से ३ आगे पहले नटखट बच्चे आगे पढ़े पोस्ट लिखी थी की " हिन्दी ब्लॉग्गिंग लौंडो -लापाडो के लिए नही है" उसको १५ कमेन्ट मिले उनसे लोगो ने जवाब माँगा था की आप बता दे किसके लिए हैं लेकिन उसने जवाब नही दिया । मैंने यह पोस्ट कल देखी थी तो सोचा के यह गहन विचार विमर्श का मसला है , क्यूंकि मैंने कई ब्लोग्स पर उम्र मे बडो लोगो को छोटो की खिचाई करते पाया , किसी कम उम्र के व्यक्ति के लिए ऐसा पढ़ कर थोड़ा बुरा लगता है ....... इसीलिए सोचा क्योँ न इस विषय पर विचार किया जाए , लोग कहते है की अक्ल उम्र और तजुर्बे के साथ आती है लेकिन अब यह सब बदल चुका है पहले इंसान की उम्र ९० - १०० साल हुआ करती थी इसीलिए उसका दिमाग एक वक्त के बाद अच्छा चलता था ..... लेकिन अब इंसान की उम्र बहुत कम हो गई तो उसका दिमाग काफ़ी तेज़ी से काम करता है , आज कल के बच्चे के सामने आप कोई काम कर दीजिये वो फ़ौरन उसको दौराहेगा और एक - दो कोशिशों मे ही उसे ठीक स...