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Showing posts with the label अमीर

सपने बोए आंसू काटे

हर्ष मंदर उसके बेटे बाबू ने उसे घर के पीछे गौशाला में मरा हुआ पाया। कुसारा मल्लागौड़ ने पिछली रात कीटनाशक दवा पी ली थी और अपने आखिरी क्षणों में नि:शब्द छप्पर के नीचे पड़ा रहा, जहां कोई उसकी आवाज नहीं सुन सका। जिंदगी की अंतिम घड़ियों में वह बिल्कुल अकेला पीड़ा से कराह रहा था। यह बिल्कुल तय था कि जैसे उसने जिंदगी जी थी, ठीक वैसे ही अकेले मरना चाहता था। वह हमेशा अपनी यंत्रणाओं को अकेले सहते हुए परिवार के लिए रक्षा कवच बना रहा, लेकिन अंतत: उसने उन सबको अकेला छोड़ दिया। उस दुख के सामने उसने घुटने टेक दिए, जो हाल के वर्षो में हिंदुस्तान के गांवों में महामारी जैसा फैल रहा है। ऐसा भयानक अवसाद, जो 22,000 किसानों की जिंदगियां लील चुका है और खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। बाबू की उम्र मुश्किल से 19 बरस थी। अचानक उसने खुद को परिवार में सबसे बड़ा पाया। उसकी दादी और बुआ दहाड़ें मारकर रो रही थीं, लेकिन उसने हिम्मत से आंसुओं को रोके रखा। ‘अगर उसने हमें बताया होता तो हम उसका कर्ज चुकाने के लिए घर का एक-एक सामान बेच देते,’ कुसारा की बहन बिलख रही थी। आसपास इकट्ठा हुए गांव के लोगों ने कहा, ‘जब दूसरे हिम्मत...

गूगल डाका डाल रहा है, गूगल की डाकेजनी का वि‍रोध करो

गूगल सर्च में जब आप कि‍ताब खोजने जाते हैं तो कि‍ताब की जगह कि‍ताब आधी, अधूरी मि‍लती है। आप कि‍ताब पढ़ते हैं, और अचानक पाते हैं कि उसके कई पन्‍ने गायब हैं। यह वैसे ही है, जैसे पुस्‍तकालय से कि‍सी कि‍ताब से कोई पाठक अपने काम के पन्‍ने फाड़कर ले जाए। फटी कि‍ताब, अधूरी कि‍ताब गूगल के ‘बुक सर्च’ का आम फि‍नोमि‍ना है। हमें समझ में नहीं आता ये गूगल वाले अधूरी कि‍ताब, कटी, फटी कि‍ताब यूजर को क्‍यों देते हैं? गूगल की नेट लाइब्रेरी में अनेक कि‍ताबें ऐसी भी हैं जि‍नका गूगल ने अभी तक कॉपीराइट नहीं लि‍या है। प्रकाशक से कॉपीराइट नहीं लि‍या है। गूगल में सीमि‍त पन्‍नों या आधी अधूरी शक्‍ल में नज़र आने वाली कि‍ताबें अवैध हैं। ये लेखक और प्रकाशक की अनुमति‍ के बि‍ना वेब पर प्रकाशि‍त कर दी गयी हैं। गूगल की इस जालसाज़ी का पर्दाफाश और प्रति‍वाद कि‍या जाना चाहि‍ए। अमेरि‍का के प्रकाशकों और लेखकों ने इस सि‍लसि‍ले में कुछ महत्‍वपूर्ण कदम भी उठाये हैं। ये बातें इसलि‍ए जानना जरूरी हैं क्‍योंकि‍ गूगल वाले हिंदी कि‍ताबों की ओर भी आने वाले हैं। सौदे पटाने की तैयारि‍यां चल रही हैं। यह कॉपीराइट का नये कि‍स्‍म का मसला ह...

वो वीक प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गये

प्रभात शुंगलू एडिटर स्पेशल असाइनमेंट पिछले पांच साल लाल कृष्ण आडवाणी कहते रहे कि मनमोहन सिंह वीक प्राइम मिनिस्टर हैं। यूपीए की सत्ता का रिमोट कंट्रोल पांच साल 10 जनपथ यानी सोनिया गांधी के पास था। लेकिन आडवाणी जी वरुण के मामले पर चुप बैठे रहे। वरुण के जहरीले भाषण को एक बार भी कंडेम नहीं किया। एक बार भी पार्टी को नहीं कहा कि वरुण के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। शायद वरुण के भड़काऊ बयानों में वो अपने पुराने दिनों की मिरर इमेज देख रहे थे। इसलिये हिम्मत नहीं जुटा पाए कि वरुण से कहें अपनी गलती की माफी मांगे वर्ना टिकट वापस ले लिया जायेगा। ये कहते तो वीक माने जाते। आडवाणी ने अपने युवा साथी शिवराज से भी कुछ नहीं सीखा। जिस दिन वरुण की सीडी का खुलासा हुया उस दिन शिवराज ने डैमेज कंट्रोल के तहत मुस्लिम संगठनों से बातचीत की। उन्हें भरोसा दिलाया वरुण के जहरीले बयान से वो कतई इत्तेफाक नहीं रखते। शिवराज ने वीकनेस दरकिनार की और हिम्मत दिखाई। आडवाणी जी सर्वजन का प्रधानमंत्री बनने का दावा नहीं कर पाए। ये रही उनकी वीकनेस। जब गुजरात दंगे हुए तब भी आडवाणी जी की वीकनेस नजर आई। मोदी के खिलाफ चूं नहीं कर पाए। अ...

मैं ‘कापीराइट’ पान वाला बाबू

रायपुर. रायपुर जिले के छोटे से कस्बे गरियाबंद में रहने वाले जीवनलाल देवांगन के हुनर की शोहरत दुनियाभर में फैल चुकी है। वे पान की सैकड़ों डिजाइन का कापीराइट लेने वाले छत्तीसगढ़ ही नहीं देश के पहले कलाकार हो गए हैं। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह समेत देश की तमाम बड़ी हस्तियां उनके बनाए पान का स्वाद ले चुकी हैं। भारत सरकार के कापीराइट दफ्तर ने पिछले दिनों उनके पान की मौलिक आकृतियों को मान्यता दे दी। इसके बाद अब कोई उनकी डिजाइन की नकल नहीं उतार पाएगा। गरियाबंद में उनके फेमस पान भंडार को ‘एफपीबी’ नाम से वल्र्ड क्लास ट्रेडमार्क मिला हुआ है। इस ग्रामीण के हुनरमंद हाथों की जादूगरी का ही कमाल है कि उनके नाम एक के बाद एक रिकार्ड दर्ज हो रहे हैं। दो साल पहले उनकी कला लिम्का बुक में दर्ज हो चुकी है, अब गिनीज बुक आफ रिकार्ड की बारी है। केन्या में 12 जुलाई को वे गिनीज बुक की टीम के सामने प्रदर्शन करेंगे। वहां खूबसूरत डिजाइन का डाक्युमेंटेशन भी होगा। मैट्रिक तक पढ़ाई के बाद जीवनलाल ने गरियाबंद में फेमस पान भंडार नाम से छोटी गुमटी लगानी शुरू की थी। आज उनके पान की सुंदर डिजाइन और स्वाद खासे लोकप्रिय हैं...

दिल को हिला देने वाले नजारे !!

य ह बात आज से ३ दिन पहले की है मैं कानपुर स्टेशन के प्लेटफोर्म नम्बर सात पर अपनी ट्रेन अवध एक्सप्रेस का इंतज़ार कर रहा था, जो की एक घंटे लेट थी, तो प्लेटफोर्म नम्बर सात पर पुष्पक एक्सप्रेस आ कर रूकती है, जो लखनऊ से बांद्रा के लिए चलती है, मैं जहाँ खड़ा था उसके सामने ट्रेन की रसोई (Pantry Car) थी, कुछ देर खड़े होने के बाद ट्रेन चली गई तभी मेरी नज़र रेल पटरी के बीच मे पड़ी जहाँ पानी की पाइप लाइन पर एक आदमी बैठा था, और वो ट्रेन की रसोई मे से फेंकी गई जूठी प्लेटो मे खाना बीन कर खा रहा था, उसके पास चार आवारा कुत्ते घूम रहे थे वो भी उन्ही प्लेटो मे से खाने की तलाश मे थे.....उस आदमी के बाएँ हाथ मे एक लकड़ी थी जिससे वो उन कुत्तो दूर भगा रहा था और दायें हाथ से जल्दी जल्दी खाना उठा कर खा रहा था, कुत्ते भी काफ़ी भूखे थे, वो भी हर तरीके से कोशिश कर रहे थे की उन्हें कुछ खाने को मिल जाए.....मैंने अपनी ज़िन्दगी मे पहली बार इंसान और जानवर को खाने के लिए लड़ते देखा था। आगे पढ़े