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कांग्रेस की फैक्ट्री से निकला नया प्रोडक्ट-राहुल

आशुतोष मैनेजिंग एडिटर आईबीएन7 आशीष नंदी बड़े विद्वान हैं और उनकी बहुत इज्जत है। चुनावों की समीक्षा करते हुए उन्होंने लिखा कि बीजेपी और दूसरी पार्टियों को उनका दंभ यानी "एरोगेंस" ले डूबा। उनकी तुलना में देश की जनता ने मनमोहन सिंह की "विनयशीलता और सज्जनता" को सराहा और उनके सिर जीत का सेहरा बांधा। नंदी का विश्लेषण दिलचस्प है, और अरुण जेटली की बात से काफी मेल भी खाता है। जेटली का कहना है कि मतदाताओ ने "श्रिलनेस" यानी अनावश्यक बयानबाजी, सतहीपने को नकार दिया, लोगों ने "मॉडरेशन" को पसंद किया न कि जिंगोइजम को। जिंगाइजम और एरोगेंस बड़े शब्द हैं और अगर नंदी और जेटली जैसे लोग इनका इस्तेमाल करते हैं तो फिर अनायास ही सबकी नजर भी उधर ही उठ जाती है। इन जुमलों से चुनावों का खूबसूरत विश्वेषण तो हो जायेगा लेकिन सही तस्वीर सामने आ पाएगी, कहना मुश्किल है। देश मे इस वक्त दो तरह की धाराएं गडमड हो रही हैं। एक, पुराने परंपरागत "प्री-इंडस्ट्रियल" अंदाज में। और दो, आधुनिक "इंडस्ट्रियल स्टाइल" में। "प्री इंडस्ट्रियल" अंदाज की राजनीति के मूल मे...

जनरल बोगी का नज़ारा....!

मैं आज सुबह लखनऊ - कानपूर से वापस आया हूँ, वहां काम के सिलसिले मे अक्सर जाना होता है । मैं मंगलवार की रात को आगरा से मथुरा - पटना एक्सप्रेस से चला था अचानक जाना पड़ा इसीलिए रिज़र्वेशन नही था तो जनरल बोगी मे सफर किया । जनरल बोगी की हालत बहुत ख़राब है उसमे बैठने के लिए ९० सीट होती हैं, ऊपर की तरफ़ एक बर्थ होती है जिस पर लोग सो जाते हैं या फिर अपना सामान रख लेते है जब भीड़ ज्यादा होती है तो वहां पर लोग बैठ जाते है, आमतौर पर लेटने की जगह नही मिलती है बैठकर ही जाना पड़ता है । परसों भीड़ कुछ कम थी इसलिए चार लोगो की एक सीट पर छह लोग बैठे थे, ऊपर की बर्थ पर तीन लोग बैठे थे, और बाकी जो बचे थे वो सब ज़मीन पर लेट गए । आगे पढे....