कंकर -कंकर में शंकर, कण-कण में भगवान माननेवाले क्या यह बताएँगे कि किसी अहिंदू की आत्मा परमात्मा का अंश नहीं है, यह कहाँ लिखा है? हर जड़-चेतन में बसनेवाला तो हर मुस्लिम और ईसाई, हर हरिजन और आदिवासी में भी है. जिस दिन हम इन्सान को इन्सान के तौर पर देखेंगे, उसे अच्छे-बुरे के रूप में पहचानेंगे उस दिन धर्म और मजहब के ठेकेदारों द्वारा खड़ी की गयी दीवारें गिर जायेंगी. इसके लिए हमें किसी एक धर्म को दूसरे से बेहतर या बदतर मानने के चक्रव्यूह से बाहर निकलना होगा. जब हम अपने विश्वास को किसी भी आधार पर सही और अन्य के विश्वास को गलत कहते हैं तो प्रतिक्रिया के रूप में असहमति, दूरी, गलतफहमी और नफरत पैदा होती है. इससे उपजा अविश्वास अच्छे लोगों को कमजोर कर आपस में लड़ाता है, जिसके फायदा वे लोग उठाते हैं जो धर्म, मजहब या रिलीजन के नाम पर पेट पालते हैं. संजय जी! आप जिनकी चर्चा कर रहे हैं, वे मुल्क के प्रति वफादार होने के साथ-साथ समझदार भी थे, उनहोंने अपने मजहब का ईमानदारी से पालन किया पर कभी उसे दूसरे धर्मों से बेहतर या एकमात्र नहीं क...