सायना नेहवाल भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी मुझे अमेरिका का सिस्टम बहुत पसंद है। वहां राष्ट्रपति पद के लिए सिर्फ दो लोग ही आमने-सामने होते हैं। इन्हें भी इनकी मैरिट के आधार पर चुना जाता है। ये दोनों अलग-अलग विचारधारा वाले समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन दोनों में से एक को जनता चुनती है और उसे राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने से पहले पूरा समय दिया जाता है ताकि वह चीजों को अच्छी तरह समझ सके और फिर पदभार संभाले। वहां सबकुछ बहुत पारदर्शी है। लेकिन भारत में तीसरा या चौथा व्यक्ति जो कि मौकापरस्त होता है उसे ही फायदा होता है। वह व्यक्ति जो समाज में अपनी ताकत, पैसे और जाति-धर्म के आधार पर जाना जाता है न कि अपने गुणों के आधार पर। जिन लोगों को हम जानते तक नहीं कई बार वे लोग हमारे देश को चलाने की बात करते नजर आते हैं। पहले दो को कोई बहुमत नहीं मिलता और तीसरा बाजी मार ले जाता है। मैं बहुत उलझी हुई हूं कि हमारे देश के नेता किस ढंग से हमारा देश चला रहे हैं। टीवी पर दिखाया गया कि कैसे संसद में घूस देकर कर लोगों को खरीदा जा रहा था। मुझे नहीं मालूम कौन सही है, वो जिसे कसूरवार ठहराया जा रहा है या वो जो कस...