कुछ पुराने भूले - बिसरे देश भक्ति के गीत - गायक --- स्व जगन्नाथ प्रसाद गुप्त ----- ---- पुराने कागज़ खंगालते हुए मुझे अपने पूज्य पिताजी स्व . जगन्नाथ प्रसाद गुप्त जी का एक पुराना कापी का पेज मिला जिसपर स्वतन्त्रता आन्दोलन के समय का उनका लिखा हुआ बहुत पुराना गीत लिखा था , जिसे पिताजी सदा गुनुगुनाया करते थे | यह गीत वे स्वतंत्रता संग्राम के क्रांतिकारियों व आज़ादी के दीवानों के साथ टोलियों में जा - जाकर सारे गाँव में गाया करते थे , प्रभात व सांध्य फेरी के साथ आज़ादी की अलख जगाते हुए --- प्रस्तुत है उनमें लिखे ये गीत ....... गीत १ - ( गीत स १२ )--- अधूरा .... जब गुरु गोविन्द ने यह देखा धर्म की होरही हानी ,.... हाँ हानी .. कूद पड़े सेना लेकरके धर्म पै बलि बलि जावो। ..... बलि बलि जावो .. देखो झांसी वाली नी भी कैसी तेग चलाई ,.... हाँ कैसी तेग चलाई ... मार गिरावो शत्रु सारे देश की लाज बचावो। ... लाज बचावो ... धर्म पै प्राण न्योछावर करदिये गुरु गोविन्द ...