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प्रसंग चित्रण, चित्र पर कविता

प्रसंग चित्रण प्रसंग है एक नवयुवती छज्जे पर क्रोधित मुख मुद्रा में है जैसे वह छत से कूदकर आत्महत्या करने वाली है। विभिन्न कवियों से अगर इस पर लिखने को कहा जाता तो वो कैसे लिखते ? ० मैथिली शरण गुप्त अट्टालिका पर एक रमणी अनमनी सी है अहो किस वेदना के भार से संतप्त हो देवी कहो? धीरज धरो संसार में, किसके नही दुर्दिन फिरे हे राम! रक्षा कीजिए, अबला न भूतल पर गिरे। ___________________________________ रामधारी सिंह दिनकर दग्ध ह्रदय में धधक रही, उत्तप्त प्रेम की ज्वाला, हिमगिरी के उत्स निचोड़, फोड़ पाताल, बनो विकराला, ले ध्वन्सों के निर्माण त्राण से, गोद भरो पृथ्वी की, छत पर से मत गिरो, गिरो अम्बर से वज्र सरीखी. __________________________________ श्याम नारायण पांडे ओ घमंड मंडिनी, अखंड खंड मंडिनी वीरता विमंडिनी, प्रचंड चंड चंडिनी सिंहनी की ठान से, आन बान शान से मान से, गुमान से, तुम गिरो मकान से तुम डगर डगर गिरो, तुम नगर नगर गिरो तुम गिरो अगर गिरो, शत्रु पर मगर गिरो। __________________________________ गोपाल दास सक्सेना 'नीरज' रूपसी उदास न हो, आज मुस्कुराती जा मौत में भी जिन्दगी, के फूल...