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स्कूलों में नहीं दी जानी चाहिए सेक्स शिक्षा

नई दिल्ली. स्कूलों में सेक्स शिक्षा पर एक संसदीय समिति ने आपत्ति जताई है। समिति ने सुझाव दिया है कि इससे संबंधित पाठों को जीवविज्ञान के सिलेबस में प्लस टू से पहले नहीं जोड़ा जाए। राज्यसभा की कमेटी ऑफ पिटीशंस ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि स्कूली बच्चों को साफ संदेश दिया जाना चाहिए कि शादी से पूर्व सेक्स नहीं किया जाना चाहिए। वरिष्ठ भाजपा नेता एम वेंकैया नायडू नीत समिति ने कहा कि छात्रों को इस तथ्य के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए कि शादी से पहले सेक्स सामाजिक मूल्यों के खिलाफ है। समिति के मुताबिक, छात्रों को इस बारे में जागरूक किया जाए कि बाल विवाह अवैध तथा लड़की के स्वास्थ्य के लिहाज से घातक है। उन्हें इस बात की शिक्षा भी दी जानी चाहिए कि 16 वर्ष की उम्र के पहले सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध भी दुष्कर्म के बराबर हैं। स्कूलों में सेक्स शिक्षा पर राष्ट्रीय बहस की मांग करने वाली याचिका पर रिपोर्ट में कहा गया है कि एचआईवी/एड्स के बारे में पाठ जीवविज्ञान के सिलेबस में उच्चतर कक्षाओं में जोड़े जा सकते हैं। आगे पढ़ें के आगे यहाँ

प्यार की पाठशाला

घूमते-घूमते यूपी लाइव न्यूज़ पर पहुंची और एक अच्छी और बुरी दोनों खासियत वाली पोस्ट पर नजर पड़ गयी इसलिए यूपी लाइव न्यूज़ से साभार यहाँ प्रकाशित कर रही हूँ कुछ वर्ष पहले एक फिल्मी गाना सुना था कोलेज में होनी चाहिए प्यार की पढ़ाई ,हमें नही पता था की वो गाना आज के स्टुडेंट सच कर के ही रहेगे स्कूल ने प्यार को भले ही अपने सेलबुस में न रखा हो मगर विद्यार्थियों ने इस विषय को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रखा है जिसे पढ़कर वो जीवन की परीक्षा पास करने का सपना दिन में और खुली आँखों से देख रहे है । माँ बाप के वो सपने जो उ न्होंने देखे,स्कूल में एक प्रेमी के बाहों में दम तोड़ दे रहे है ,प्यार करना ग़लत तो नही है लेकिन हर कम के लिए एक समय होता है लेकिन आज के बच्चो को भला सब्र कहा है । ये तस्वीरे साफ कह रही है की आज के स्टुडेंट kis तरह अपने पढ़ाई और अपने परिवार के प्रति बेईमानी कर रहे है और प्यार की ये पढ़ाई जब दुनियादारी की इम्तहान में फ़ैल कर देती है तो ये समाज को ही दोष देते फिरते है । इस तरह के लोग जो इसी तरह पढ़ा ई कर आए है और अब दर दर भटक रहे है महज एक नौकरी के लिए वो भी नही मिलती , भाई इस तरह ...

विचारधारा की जिद और बीजेपी की मुश्किल

आशुतोष मैनेजिंग एडिटर ibn7 अभी सोच ही रहा था कि खबर आ गयी कि वरुण गांधी पीलीभीत से ही लड़ेंगे। खुद पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने ऐलान कर दिया। कुछ समझा और कुछ नहीं समझा। समझ और नासमझ के बीच धड़ाम होते-होते ये भी सोचा कि क्या ये कहना जरूरी था। बिना कहे भी तो कई बातें हो जाती हैं। समझ में नहीं आया कि क्यों एक पार्टी जो छह साल तक सरकार में रही है और जिसकी आधा दर्जन से ज्यादा राज्यों में सरकार हो वो भला कैसे किसी संवैधानिक संस्था की खुलेआम अवहेलना कर सकती है। सवाल ये है कि जब वो मानते हैं कि ऐसी बातों से पार्टी की छवि को धक्का लगता है और इससे नयी युवा पीढ़ी में बीजेपी के खिलाफ एक माहौल बनता है तो फिर बीजेपी और संघ परिवार का बेताल वहीं से उड़ कर वहीं क्यों आ बैठता है? क्या ये महज इत्तफाक है या फिर कुछ दूसरी चीजें हैं जो संघ परिवार और बीजेपी को मथती रहती हैं और वो इससे बाहर नहीं निकल पाती। दरअसल विचारधारा की एक अजीब जिद होती है। ये सभी विचारधाराओं के लिये सच है। विचारधारा की उपज और विकास के बीज में होता है एक गहरा विश्वास जिसके ऐतिहासिक कारण होते हैं। जब 1925 में आरएसएस का जन्म हुआ तो वो स...

प्रधानमंत्री का फैसला चुनाव के बाद: मायावती

बीएसपी अध्यक्ष मायावती ने आज साफ कर दिया है कि तीसरे मोर्चे में शामिल होने के बदले में उन्होंने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होने की शर्त नहीं रखी है। मायावती ने आज दिल्ली में तीसरे मोर्चे के नेताओं को डिनर पर बुलाया है। इससे पहले उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का फैसला चुनाव के बाद होगा। मायावती के इस बयान ने तीसरे मोर्चे में बीएसपी की भागेदारी मयावती को प्रधानमंत्री बनाने की शर्त पर की खबर की हवा निकाल दी। पर मायावती ने ये जरूर बता दिया कि उनकी नजर केन्द्र की सरकार पर ही है कांशीराम के सपने को सच करने के लिए मायावती ने जिन राजनीतिक दलों पर निशाना साधा है वो भी साफ करता है कि मायावती की नजर है तो पीएम की गद्दी पर ही। पीएम बनने की बात मुंह में भले ही मायावती जी न लायी हों पर उनका हर शब्द चिल्ला रहा था कि मुझे देश का प्रधानमंत्री बना दो। वैसे ये महज इत्तिफाक नहीं था कि कांशीराम जी के जन्मदिन पर मायावती ने उनका सपना बताया केन्द्र पर कब्जा और उसी दिन उन्होंने अपनी जीवनी का अंग्रेजी तर्जुमा भी जारी किया और ऐन उसी दिन उन्होंने दिल्ली में अपने नए पते का ऐलान किया जो कि संसद के पिछवाड़े है और उ...

नारी देह, नग्नता और हमारा समाज

संवादघर  ( www.samwaadghar.blogspot.com)  में   नारी की दैहिक स्वतंत्रता व सामाजिक उपयोगिता पर जो बहस चल रही है वह रोचक तो है ही ,  बहुत महत्वपूर्ण भी है । एक ऐसा एंगिल जिससे अभी तक किसी ने इस विषय पर बात नहीं की है ,  मैं सुधी पाठकों के सम्मुख रख रहा हूं  !   बहस को और उलझाने के लिये नहीं बल्कि सुलझाने में मदद हो सके इसलिये  !  नारी देह के डि - सैक्सुअलाइज़ेशन  (de-sexualization)  की दो स्थिति हो सकती हैं ।    पहली स्थिति है  -  जहरीला फल चखने से पहले वाले आदम और हव्वा की  - जो यौन भावना से पूर्णतः अपरिचित थे और शिशुओं की सी पवित्रता से ईडन गार्डन में रहते थे।    ऐसा एक ही स्थिति में संभव है  -  जो भी शिशु इस दुनिया में आये    उसे ऐसे लोक में छोड़ दिया जाये जो ईडन गार्डन के ही समकक्ष हो । वहां यौनभावना का नामो - निशां भी न हो ।   " धीरे धीरे इस दुनिया से भी यौनभावना को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना है " -  यह भी लक्ष्य हमें अपने सामने रखना होगा ।   यदि यह संभव नहीं है या    हम इसके लिये तैयार नहीं हैं तो दूसरी स्थिति ये हो सकती है कि हम न्यूडिस्ट समाज की ओर बढ़ें और ठीक वैसे ...