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जल स्टार के अंतर्गत संजय सेन सागर सम्मानित

जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए दैनिक भास्कर समूह द्वारा स्थापित पहला जलस्टार अवॉर्ड बीना के शिक्षक चंद्रप्रकाश तिवारी को दिया गया। बुधवार शाम भोपाल स्थित भास्कर कार्यालय में आयोजित गरिमामय समारोह में इस राज्यस्तरीय सम्मान आयोजित किया गया। देश 10 राज्यों से प्राप्त प्रविष्टियों के आधार राज्यस्तर पर चयन समितियों ने विजेताओं का चयन किया। इस अवसर में मध्यप्रदेश से 38 लोगों का चयन किया गया। जिसमे संजय सेन सागर जी जल जागरूकता के लिए सम्मानित किया गया. इस अवसर पर संजय सेन जी ने कहा की ''जल समस्या इतनी बड़ी भी समस्या नहीं है लेकिन इसे इतना बड़ा बना दिया गया है,क्योंकि आज बिसलरी पीने वालों को लगता है की जल संकट उन पर नहीं आएगा,लेकिन वो गलत सोचते है क्योंकि जल संकट की चपेट में सबसे पहले वही लोग आने वाले है अगर बिसलरी वाला बर्ग जल की महत्वता के लिए काम करता है तो यह अभियान और भी आसन हो जायेगा।

होनहार नन्हे आविष्कारक

रेम्या, अर्चना, राकेश, निशा, अभिषेक, रिया, निमरन, काम्या, मेहर और अशोक न तो बड़ी उम्र के अनुभवी लोग हैं और न ही हार्वर्ड या ऑक्सफोर्ड से पढ़कर निकले नामचीन वैज्ञानिक। ये भारत के विभिन्न हिस्सों में स्कूलों में पढ़ रहे किशोर उम्र के छात्र हैं। पिछले सप्ताह जब नेशनल इन्नोवेशन फाउंडेशन ने इन मेधावी छात्रों को इनकी खोज के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया और इनके आविष्कारों को प्रदर्शित किया, तो बड़े-बड़े लोगों ने दांतों तले उंगली दबा ली, जिनमें कई विदेशी और वैज्ञानिक भी थे। कितने लोगों को यह खयाल आता है कि एक ऐसी वाशिंग मशीन बनाई जाए जो साइकिल की तरह पैडल से चले ताकि कपड़े भी धुल जाएं और लगे हाथ व्यायाम भी हो जाए और बिजली की किल्लत से भी छुटकारा मिल जाए? स्टेशन पर लगातार खड़े-खड़े रेल के इंतजार में सामान की चौकसी करते हुए कितने लोग सोचते हैं कि अटैची में एक कुर्सी जुड़ी होती ताकि उसे खोलकर बैठ जाते और आराम से रेल के आने का इंतजार करते? कितनों को यह खयाल आता है कि काश एक ऐसी मशीन होती जिसमें सारा सामान डाल देते और खाना अपने आप बन जाता? पैरों से मोहताज किसी व्यक्ति को बैसाखी के सहारे ...

आधी रात का सच...गैस त्रासदी का दस्तावेज़

tuesday, march 08, 2011 आधी रात का सच...गैस त्रासदी का दस्तावेज़ रविवारी पुस्तक चर्चा में इस बार शामिल किया है वरिष्ठ पत्रकार विजयमनोहर तिवारी की हाल में प्रकाशित पुस्तक-भोपाल गैस त्रासदी-आधी रात का सच को। हिन्दी में इस विषय पर लिखी गई अपने ढंग की यह अनूठी पुस्तक है। इसके पैपरबैक, पॉकेटबुक साईज के संस्करण का मूल्य 195 रु है और पृष्ठ संख्या 300 है । भो पाल गैस त्रासदी पर यूँ तो बीते पच्चीस बरसों में हज़ारों दस्तावेज़ विभिन्न संगठनों ने जुटाए और उन्हें न्यायालय ने देखा-परखा। बहुत सामान्य सी, नितांत भारतीय परम्परा के तहत इस मामले में दर्ज़ आपराधिक मुकदमे का फैसला दुर्घटना या हादसे के ठीक पच्चीस साल छह महिने बाद आया। आधी रात का सच एक ऐसी क़िताब है जो हिन्दी में शायद अपनी क़िस्म का अनूठा और पहला दस्तावेज़ है जो भोपाल गैस त्रासदी से जुड़े तमाम पहलुओं पर बेबाकी से नज़र डालता सा लगता है। त्रासदी के जिम्मेदार लोगों और सरकार के बीच के आपराधिक-षड्यंत्रों, प्रशासन और पुलिस की शर्मनाक लापरवाहियों, पीड़ितों को न्याय दिलाने के नाम पर सामाजिक संगठनों की बेशर्म खींचतान के बीच मीडिया के सकारात्मक र...

भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग में एक और शहादत!

तिरुवंतपुरम भ्रष्टाचार के खिलाफ जब सार्वजनिक उपक्रम के कंपनी सेक्रटरी ने सूबे के सीएम से लेकर उच्च अधिकारियों तक पत्र लिखा और हर स्तर पर आवाज उठायी तो उसे खुदकुशी करनी पड़ी। पहली नजर में दिख रही इस खुदकुशी में अब चौकाने वाली खबर आ रही है। खुदकुशी के बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट एक नई कहानी बयां कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर नजर डालें तो आपको भी लगेगा कि दाल में कुछ काला तो जरूर है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक उनके शरीर पर आठ घाव थे। रिपोर्ट तो केवल यहीं बयां करती है कि उनकी मृत्यु कैसे हुई। लेकिन उनके शरीर पर लगे चोट कुछ पुरानी घटनाओं पर नजर डालने को मजबूर कर देतीं है। भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी थी जंग सासींद्रन जब एक सार्वजनिक उपक्रम मालाबार सिमेंट लि. के कंपनी सेक्रटरी थे तो कई सवाल उठाए थे।पिछले सितंबर में सूबे के मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री और विजिलेंस डायरेक्टर को पत्र लिखकर बताया था कि कंपनी में तेजी भ्रष्टाचार फैल रहा है। और इस पर काबू पाना मुश्किल हो रहा है। इन्होंने मैनेजिंग डायरेक्टर सेक्रेटरी पी.सूर्यनारायणन पर कंपनी की गोपनीय सूचनाओं को लीक करने का आरोप लगाया। कुछ दिनों के ...

उलझन: शादी के बाद घर आते ही बहू को होने लगीं उल्टियां

उलझन कही भी हो सकती है किसी को भी हो सकती है यहाँ हम बांटते है अपनों की उलझन अपनों के साथ,यहाँ पर प्रस्तुत है एक उलझन और उसके चुनिन्दा कुछ सुझाव अगर आपको लगता है की कोई और भी सुझाव है जो इस उलझन को मिटाने में कारगार है तो कमेंट्स बॉक्स में अपना सुझाव रखें.. शादी के बाद घर आते ही बहू को उल्टियां होने लगीं। दो महीने बाद डॉक्टर ने बताया कि वह गर्भवती है। सोनोग्राफी हुई तो पता चला कि गर्भ में तीन महीने का बच्चा है। शादी को दो ही महीने हुए और तीन महीने का बच्चा! इस बारे में बहू से पूछा तो उसने बताया कि वह बच्चा उसके मौसाजी का है। बहू रोकर कहने लगी कि मैं आत्महत्या कर लूंगी। मैंने उसे समझाया कि मैं उसका साथ दूंगी। मौसा को बुलाकर बात की, तो उसने बच्चे का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली। कुछ समय बाद बहू ने एक बेटी को जन्म दिया। बच्चे के होने के बाद मौसा कभी-कभी कुछ रुपए दे जाता था। अब उससे पैसे मांगो तो वह आत्महत्या करने की धमकी देता है। मेरी आर्थिक स्थिति भी इतनी अच्छी नहीं है कि मैं किसी का भला कर पाऊं। मुझे समझ नहीं आ रहा है कि क्या करूं? सराहनीय सुझाव : आशा नय्यर कपूरथला, पंजाब आपक...

संवेदना के धागों से बुनी एक खबर

वर्तिका नन्दा एक अकेला भारत ही संवेदनशील है, भावनाओं के समुंद्र में बहता है और वह उफान में रोज गहराता है, ऐसा नहीं है कार्ला ब्रूनी जब फतेहपुर सीकरी जाती हैं तो अपनी दूसरी शादी और पहले से एक बच्चे की मां होने के बावजूद यह जानकर भावुक हो उठती हैं कि यहां मुराद मांगने से झोली जरूर भरती है। हाथ में चादर लिए वे माथा टेक कर कई मिनट लगातार सरकोजी के जरिए एक बच्चे की मुराद मांगती चली जाती हैं और जब चादर चढ़ा कर बाहर आती हैं तो उनके चेहरे पर नारी सुलभ संकोच और सौम्यता टपकती दिखती है। इलेक्ट्रानिक मीडिया इसी संकोच पर खबर दर खबर गढ़ता चला जाता है। कुछ जगह आधे घंटे के प्रोग्राम बना दिए जाते हैं। कार्ला और सरकोजी कव्वाली की धुन के बीच उस सलीम चिश्ती के रंग में सराबोर दिखते हैं जिसने बादशाह अकबर को भी खाली हाथ नहीं भेजा था। कार्ला बार-बार नमस्ते की मुद्रा में दिखाई देती हैं, कैमरों के सामने उनकी मुस्कुराहट और भी खिल कर सामने आती है। वे भाव विभोर हैं। कैमरे, संगीत का प्रभाव और दमदार एडिटिंग ऐसे माहौल को निर्मित कर देते हैं जहां दुनिया के एक प्रभावशाली देश का शासक भी महज एक याचक की तरह दिखाई देता है...

राज कपूर: एक तारा न जाने कहां खो गया

14 दिसंबर 1924 को जन्मे रणबीर राज कपूर एक ऐसी शख्सियत हैं जिन्हें फिल्म निर्माण की किसी एक विधा से जोडक़र उनका सही मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। क्या नहीं थे वे? निर्माता, निर्देशक, अभिनेता, गीत-संगीत की बारीकियां समझने वाला शख्स, फिल्म संपादन का विशद् ज्ञान रखने फिल्मकार। एक बहुआयामी व्यक्तित्व, जिसने भारतीय सिनेमा को अपने अविस्मरणीय योगदान से समृद्ध किया। फिल्मों के सेट पर क्लैप देने वाला वह मामूली लडक़ा एक दिन भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा शोमैन बन जाएगा, तब किसी ने सोचा नहीं होगा। उस लडक़े के असाधारण पिता पृथ्वीराज कपूर ने भी शायद ही सोचा होगा कि आगे चलकर उनका यह बेटा एक दिन उन्हीं को निर्देशित करेगा। लेकिन, महान लोग हमेशा अप्रत्याशित होते हैं और इसमें कोई शक नहीं कि राज कपूर एक महान फिल्मकार थे। शुरुआती दौर में फिल्म स्टूडियो में छोटे-मोटे काम करने वाले राज की प्रतिभा को पहचाना केदार शर्मा ने और अपनी फिल्म ‘नीलकमल’ (1947) में हीरो की भूमिका दी। फिल्म की नायिका तब की सुपर स्टार मधुबाला थीं। महबूब की ‘अंदाज’ (1949) से राज इंडस्ट्री के चहेते कलाकार बन गए। सही मायनों में वे संपूर्ण ...

हां, मैं चमार हूं!

राजेंद्र. के. गौतम हां मैं चमार जाति का हूं | मैं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी की मुख्यमंत्री मायावती को चुनौती देता हूं कि इसको गलत साबित करें | मायावती ने दलितों के उत्थान के लिये कुछ नहीं किया | राष्ट्रीय अनुसूचित जाती आयोग द्वारा उठाये गये सवालों से मायावती भयभीत हैं ,इसलिए दलित उत्पीड़न के मामलों को छुपा रही हैं | राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पी.एल.पुनिया ने मुख्यमंत्री द्वारा बार – बार उनकी जाति और आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जाने पर एक विशेष बातचीत में ये जबाब दिए | राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पी.एल.पुनिया ने कहा कि वे हरियाणा राज्य से चमार जाति के हैं | इसलिए मुख्यमंत्री मायावती को अगर कोई तकलीफ है तो उनको इसकी जांच कराने की चुनौती देता हूं | उन्होंने कहा कि मायावती बताएं कि वे यूपी की हैं या दिल्ली की ? उन्होंने कहा कि मैं बाबा साहब अम्बेडकर के बनाए गए संविधान का निर्वहन कर रहा हूं | बाबा साहब ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के संविधान की धारा 338 और इसकी उप 10 धाराओं में कर्तव्यों का विस्तार से उल्लेख किया है | बाबा साहब को ...

तकनीक समझने के लिए 4 दिन तक बैंक में छिपा रहा चोर

जयपुर. बैंक के एटीएम और लॉकर खोलने की तकनीक समझकर रुपए चुराने के लिए एक चोर वैशाली नगर इलाके में पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में चार दिन तक छिपा रहा। उसने लॉक कोड का पता लगाने के लिए लॉकर रूम के सामने एवं एटीएम में मोबाइल और खुफिया कैमरा तक लगा दिया। यह चोर बैंक के बेसमेंट में स्थित रिकॉर्ड रूम में एक टेबल के नीचे फाइल लगाकर सोता रहा और बैंक वालों को भनक तक नहीं लगी। पांचवें दिन मंगलवार को जब सवेरे साढ़े 8 बजे चोर बैंक में चाय बना रहा था, तभी अचानक सफाईकर्मी आ गया और उसने बैंक का गेट बंद कर मैनेजर व पुलिस को बुला लिया। आरोपी दीपक ने पूछताछ में बताया कि इससे पहले 4 जून 2010 को भी वो इसी बैंक में पीछे से खिड़की की ग्रिल हटाकर अंदर घुसा था और दो दिन तक रहा था। तब छेनी से स्ट्रांग रूम तोड़ने का प्रयास किया था, लेकिन सफल नहीं हुआ। इस बार वह 4 नवंबर को 3 बजकर 37 मिनट पर बैंक टाइम के दौरान नजरें बचाकर सीधे बैंक के रिकॉर्ड रूम में जाकर छिप गया। बैंक बंद होने के बाद वह मैनेजर के कैबिन में से जो एटीएम में रास्ता जाता है, वहां गया। यहीं से बैंककर्मी एटीएम में पैसे डालते है। वहां पर दीपक ने सेलो...