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Showing posts with the label बच्चो की कविता

डा श्याम गुप्त के दोहे--

सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ--- कविताई का सत्य-- जिनकी कविता में नहीं ,कोई कथ्य औ तथ्य। उनकी कविता में कहां, श्याम’ ढूढिये सत्य ॥ तुकबन्दी करते रहें, बिना भाव उद्देश्य । देश धर्म ओ सत्य का, नहीं कोई परिप्रेक्ष्य॥ कला कला सौन्दर्य रस, रटते रहें ललाम । जन मन के रस भाव का, नही कोई आयाम॥ गूढ शब्द पर्याय बहु, अलन्कार भरमार । ज्यों गदही पर झूल हो, रत्न जटित गल हार ॥ कविता वह है जो रहे, सुन्दर सरल सुबोध । जन मानस को कर सके, हर्षित प्रखर प्रबोध ॥ अलन्कार रस छन्द सब, उत्तम गहने जान। काया सच सुन्दर नही, कौन करेगा मान ॥ नारि दर्शना भव्य मन, शुभ्र सुलभ परिधान । भाल एक बिन्दी सहज़, सब गहनों की खान ॥ स्वर्ण अलन्क्रत तन जडे, माणिक और पुखराज भाव कर्म से हीन हो, नारि न सुन्दर साज ॥ भाव प्रबल,भाषा सरल, विषय प्रखर श्रुति -तथ्य । जन जन के मन बस सके, कविताई का सत्य ॥

कोयल की मीठी बोली ..

कोयल कू कू करती है॥ बच्चो का मन भरती है॥ इसकी प्यारी बोली है ॥ लगाती कितनी भोली है॥ इसकी गीत बड़ी मतवाली ॥ सब के मन को भने वाली॥ प्यार का गीत सुनाने वाली॥ मन को बहुत लुभाने वाली॥ प्रात : होते उठ कहती बच्चो ॥ उठो सबेरा आया है॥ चन्दा मामा चले है घर को॥ रवि किरण फैलाया है॥ ये प्यारी गीत सुनाती है॥ प्रेम का पाठ paDhati है॥ ऐसे बच्चो एक दिन जग में । नाम अमर कर जाओ गे॥ छोडे सपने जो बापू थे ॥ पूरा करके दिखाओ गे॥ मीठी इसकी बोली है॥ लगाती कितनी सोनीहै॥ प्यारी गीत सुनाती है ,, सब का मन बहलाती है॥ कोयल कू कू करती है॥ बच्चो का मन भरती है॥