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किसे है हज़ारों प्रभावित परिवारों की सुध...?

"मेरे भाई दुबई में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करते थे. अच्छी पगार थी. वो घर भर का सहारा थे, उनके भेजे पैसे से गृहस्थी की गाड़ी खिंच रही था. बहन की शादी की तैयारियां की जा रही थीं..... अब सारे अरमानों पर पानी फिर गया है." गोरखपुर के रहनेवाले सैय्यद शमसुद्दीन हैदर के बड़े भाई की नौकरी चली गई है. यह परिवार भारत के उन लाखों परिवारों जैसा ही है जो विदेश जाकर कमाने वाले लोगों के ज़रिए यहाँ अपनी गृहस्थी की गाड़ी खींच रहे हैं. आर्थिक मंदी की चपेट में आई विश्व अर्थव्यवस्था के कारण अर्थजगत के बड़े बड़े प्रतिष्ठान अपने बुरे दौर से गुज़र रहे हैं. अमरीका, यूरोप और अरब देशों में कितने ही लोगों को छटनी करके बाहर कर दिया गया है. कई लोग कम तन्ख़्वाहों पर काम करने को मजबूर हैं. इस रिपोर्ट को सुनने के लिए यहां क्लिक करें भारत से भी काम के लिए लोगों के बाहर जाने का प्रवाह धीमा हुआ है. वापस आनेवालों की तादाद बढ़ती जा रही है. वायलार रवि पिछले वर्ष तक विदेश में रह रहे भारतीयों के ज़रिए भारत आ रही पूंजी का आंकड़ा लगभग 30 अरब अमरीकी डॉलर के आसपास था पर इसबार इसमें रिकॉर्ड बढ़त हुई है और इस पैसे क...

राजस्थान में तीन अस्पताल 'सील' हुए

राजस्थान की सरकार ने करौली में बच्चों को प्रलोभन देकर ख़ून निकालने के मामले में तीन अस्पतालों को 'सील' कर दिया है और एक नर्सिंग होम के मालिक को गिरफ़्तार किया है. इसी के साथ इन निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड मशीनों के लाइसेंस रद्द कर दिए गए हैं. राजस्थान पुलिस पहले ही दो डॉक्टरो सहित पाँच लोगों को गिरफ़्तार कर चुकी है. इन लोगों के ख़िलाफ़ कचौरी, जूस और कुछ पैसे देकर बच्चों का ख़ून निकालने का आरोप है. करौली ज़िले की पुलिस ने बुधवार को कहा था कि ऐसे बच्चों की संख्या तीस हो सकती जो इस षड्यंत्र के शिकार हुए होंगे. इन लोगों ने चिकित्सकों के लिए तय किए गए नौतिक नियमों का उल्लंघन किया है और प्रशासन इनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करेगा नीरज पवन, ज़िला अधीक्षक, करौली करौली के ज़िला अधीक्षक नीरज पवन ने मेडिकल काउंसिल को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि तीन डॉक्टरों का पंजीकरण रद्द कर दिया जाए क्योंकि उन्होंने तय नौतिक नियमों का उल्लंघन किया है. नीरज पवन का दावा था, "इन लोगों ने चिकित्सकों के लिए तय किए गए नौतिक नियमों का उल्लंघन किया है और प्रशासन इनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई करेगा....

मैं ‘कापीराइट’ पान वाला बाबू

रायपुर. रायपुर जिले के छोटे से कस्बे गरियाबंद में रहने वाले जीवनलाल देवांगन के हुनर की शोहरत दुनियाभर में फैल चुकी है। वे पान की सैकड़ों डिजाइन का कापीराइट लेने वाले छत्तीसगढ़ ही नहीं देश के पहले कलाकार हो गए हैं। प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह समेत देश की तमाम बड़ी हस्तियां उनके बनाए पान का स्वाद ले चुकी हैं। भारत सरकार के कापीराइट दफ्तर ने पिछले दिनों उनके पान की मौलिक आकृतियों को मान्यता दे दी। इसके बाद अब कोई उनकी डिजाइन की नकल नहीं उतार पाएगा। गरियाबंद में उनके फेमस पान भंडार को ‘एफपीबी’ नाम से वल्र्ड क्लास ट्रेडमार्क मिला हुआ है। इस ग्रामीण के हुनरमंद हाथों की जादूगरी का ही कमाल है कि उनके नाम एक के बाद एक रिकार्ड दर्ज हो रहे हैं। दो साल पहले उनकी कला लिम्का बुक में दर्ज हो चुकी है, अब गिनीज बुक आफ रिकार्ड की बारी है। केन्या में 12 जुलाई को वे गिनीज बुक की टीम के सामने प्रदर्शन करेंगे। वहां खूबसूरत डिजाइन का डाक्युमेंटेशन भी होगा। मैट्रिक तक पढ़ाई के बाद जीवनलाल ने गरियाबंद में फेमस पान भंडार नाम से छोटी गुमटी लगानी शुरू की थी। आज उनके पान की सुंदर डिजाइन और स्वाद खासे लोकप्रिय हैं...

अनुशासन हीन क्यों है पीढी ????

उछाले गये प्रश्न,  अनुशासन हीन क्यों है आ्ज की पीढी ? क्यों हें दूरियां,द्वन्द्व,अन्तर्द्वन्द्व- बच्चों व माता पिता में ? चुनते रहे पत्तियां, बच्चों पर हैं बडे दबाव,पढाई के ,ट्यूशन के, मां-बाप की आकान्क्षाओं के । ब्च्चों से सीखें मां- बाप, बच्चों को गुरू मानकर। ्बच्चों को सिर्फ़ पैसे सुविधा नहीं, अपना समय भी दें,मित्र बनें,पूरी बात सुनें ,समझें । बच्चे भी मां बाप की सुनने की बजाय , अपनी ही तानते हैं; ्टीचर व दोस्तों कि अधिक मानते हैं, टी. वी.,सिनेमा,इन्टर्नेट को अधिक पहचानते हैं । कौन जा पाया जड में -- आरहा है देश में, अवान्छित धन, योरोप,अमेरिका के जुआघरों, चकलाघरों,नन्गे नाच के क्लबों, आतन्क्बाद्व व ् निरीहों पर अत्याचार व- शस्त्रों की होड के पोषण के लिये, हथियारों की बिक्री की कमाई का । कभी बिकास के नाम पर,सहायता व कर्ज़, एवम एन.जी.ओ. प्रोजेक्ट या-- बहुराश्ट्रीय कम्पनियों ्के बिकास में लिप्त- हमें, मोटी-मोटी आमदनी, पे-पर्क्स, के रूप में । ""जैसा खायें अन्न, वैसा होगा मन। ""