गीत आचार्य संजीव 'सलिल' संकट में, हिम्मत मत हार। कोशिश का खुला रहे द्वार.... शूल बीन फूल नित बिखेर। हो न दीन, कर नहीं अबेर। तम को कर सूरज बन पार.... माटी की महक नहीं भूल। सर न चढ़े पैर दबी धुल। मारों पर न करना तू वार... कल को दे कल से अब जोड़। नातों को पल में मत तोड़। कलकल कर बहे 'सलिल'-धार... ************ कलकल कर बहे 'सलिल'-धार...