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T-20: हारना ही था, आखिर मुगालते कब तक साथ देते...

कैसे गलतफहमियां और अतिआत्मविश्वास टीम इंडिया को ले डूबे, टूर्नामेंट से विदाई का बयास बनें कारणों के विश्लेषण का प्रयास... गलतफहमी नं 1 - हम सबसे बेहतर टी-20 टीम हैं। वास्ताविकता- हां हम सबसे बेहतर टी-20 टीम थे। पिछले कुछ सालों में जब हमने टी-20 वर्ल्डकप जीता था तब, उसके बाद कई टीमों ने हमें कई मौकों पर हराया था। फिर भी हम गलतफहमी का शिकार रहे। गलतफहमी नं 2 - हमें टी-20 का सर्वाधिक अनुभव है। वास्तविकता- पहले टी-20 वर्ल्डकप तक कोई भी टीम ठीकठाक तरीके से इस फार्मेट में खेलने का तरीका नहीं जानती थी। उसके बाद अन्य टीमों ने जहां अपने खेल में काफी सुधार किया वहीं हम लगातार इस मुगालते में रहे कि टी-20 में हम ही सबसे बेहतर हैं। यहां तक की हमने यह भी नहीं देखा कि उसके बाद दो आइपीएल सीजन हो चुके हैं इसमें काफी विदेशी खिलाड़ी खेले हैं। कई विदेशी कोचों ने यहां अनुभव प्राप्त किया है। इस बात तक को नजरअंदाज किया कि इन आइपीएल सीजनों में भारतीयों के समकक्ष ही विदेशी खिलाडि़यों ने जबर्दस्त प्रदर्शन किय है। गलतफहमी नं 3 - टी-20 युवाओं का खेल है। हमारी टीम का औसत आयु सबसे कम है। वास्तविकता- आइपीएल में बुजु...

ईरान में राष्ट्रपति पद के लिए मतदान शुरू

ईरान में राष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए मतदान का काम अब से कुछ देर पहले शुरू हो चुका है. इस चुनाव में कट्टरवादी माने जाने वाले वर्तमान राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद और सुधारवादी नेता मीर हुसैन मुसावी के बीच मुख्य मुक़ाबला होने की संभावना जताई जा रही है. ईरान की काउंसिल ने चुनाव में चार लोगों के नाम को अंतिम सहमति दी थी. बाक़ी के दो नाम मोहसिन रेज़ाई और मेहदी करूबी के हैं. क़रीब साढ़े छह करोड़ की जनसंख्या वाले ईरान में शुक्रवार को हो रहे मतदान पर दुनियाभर के देशों की नज़र है. सबको यह जिज्ञासा है कि ईरान में सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा. क्या सुधारवादी नेता को लोग मौक़ा देंगे या अहमदीनेजाद अपना दौर दोहराएंगे. ख़ासकर पश्चिम के देशों की ईरान के चुनाव में इसलिए भी दिलचस्पी बढ़ गई है क्योंकि उनका अनुभव अहमदीनेजाद के साथ अच्छा नहीं रहा है और शीर्ष बदलाव के बिना उन्हें ईरान के तेवरों में बदलाव की उम्मीद भी कम है. युवा हैं निर्णायक इस बार के चुनाव में 18 साल से अधिक की आयु वाले मतदाताओं की संख्या क़रीब चार करोड़ 60 लाख है. कुल मतदाताओं में से क़रीब 80 लाख मतदाताओं का जन्म 1979 में हुई क्रांति के ब...

हमें नही चाहियें ऎसा राष्ट्ध्रम और ऎसी देशभक्ती..!!

मैं काफ़ी दिनों से देख रहा हू की इस हिन्दी ब्लोगिंग जगत को कुछ तुच्छ मानसिकता वाले हिन्दी ब्लोग्गर दो हिस्सो मे बाटनें मे लगे हुए हैं। इनके ब्लोग पर आपको हमेशा हिन्दुत्व के सम्बन्ध मे, भाजपा और संघ की तारीफ करती हुई पोस्ट मिलेगीं। मुझे उनके भाजपा या किसी और तारिफ़ करने से कुछ परेशानी नही हैं, परेशानी मुझे इस बात से है कि इनका हर लेख काग्रेंस, इस्लाम और मुस्लिम समुदाय की बुराई से शुरू होता है और सघं, भाजपा, और हिन्दुत्व की तारिफ पे खत्म होता है। इन सब के ब्लोग्स पर Comment Moderation लगा हुआ है, जो टिप्पणी इनको प्रकाशित करनी होती है उसे प्रकाशित करते है वर्ना जो टिप्पणी कुछ ज़्यादा ही इनके खिलाफ होती उसे ये पी जाते है, इनके लेख पढेंगे तो ऐसा लगेगा जैसे की आप भाजपा या सघं के किसी नेता का भाषण सुन रहें है।