इस बार सुखनसाज ब्लॉग की चर्चा कर रहे है रवींद्र व्यास जी,जिसे हम वेबदुनिया से साभार यहाँ प्रकाशित कर रहे है यह एक सुरीला ब्लॉग है। यह एक नशीला ब्लॉग है। सुरीला इसलिए है कि यहाँ एक से एक फ़नकारों की महफिल सजी हैं। अपनी पुरकशिश और पुरनम आवाज़ के साथ। अपनी ही लय में मगन, सुनने वालों को भी मगन करती हुई। अपनी कलाकारी और गलाकारी के साथ। ये आवाज़ इतनी साफ है जैसे मीठे झील के पानी में आप अपनी आत्मा की झलक देख सकते हैं। ये आवाज़ें इतनी महीन हैं कि इसमे कायनात की धीमी से धीमी आवाज सुनी जा सकती है। जैसे दिल टूटने की आवाज़ या फिर ओस की तरह टपकते आँसू की आवाज़। या विरह में किसी की आह की आवाज़। और यह नशीला इसलिए है कि यहाँ एक से एक आला दर्जे के शायरों का अंदाजे बयां हैं। दिल की बातें हैं, चाँद की बातें हैं, जुल्फों और रात की बातें हैं। मिलन की और विरह की बातें हैं। इश्क में फना हो जाने की और खुदा हो जाने की बाते हैं। यहाँ नाजुक खयाल हैं, बहते जज्बात हैं। दिल से निकली बातें हैं, दिल में उतरती बातें हैं। यह सुखनसाज़ ब्लॉग है। यह सिर्फ ग़ज़लों का ब्लॉग है। यहाँ ग़ज़लें पढ़ीं भी जा सकती हैं और सुनी भी ...