इस बार उलझन में हम बात कर रहे है विनीता जी की,यह एक संयुक्त परिवार से है जहा एक लम्बा अरसा गुजार देने के बाद भी वो समस्यों से दो चार हो रही है उन्होंने अपनी समस्या को रखा है जहा कुछ दोस्तों ने अपने सुझाबों के माध्यम से निराकरण करने की कोशिश की है,हमें आपके भी जवाबों की प्रतीक्षा है और अगर आप भी कशमकश या उलझन में है तो हमें कहें :- माडरेटर उलझन विनीता सिंह कोटा, राजस्थान मैं कार्यरत महिला हूं। हमारा संयुक्त परिवार है। पति लेखाकर हैं व शादी को पंद्रह साल पूरे हो चुके हैं। सालभर से मैं मानसिक तनाव झेल रही हूं। पति जरा-जरा सी बात पर चिल्लाना शुरू कर देते हैं। साथ ही इनकी मां भी शुरू हो जाती हैं। ये अपनी बातें बहन, मां, मामी और भाइयों से बांटते हैं, लेकिन मुझसे कभी नहीं। बड़ों की देखा-सीखी बेटी भी मुझे कुछ नहीं समझती। कई बार सोचती हूं आत्महत्या कर लूं या अलग हो जाऊं, पर परिवार की प्रतिष्ठा का ख्याल आते ही रुक जाती हूं। हमारे बन रहे नए मकान की केवल नींव भरकर छोड़ दी है। पति मुझे कहते हैं ‘तेरी वजह से काम बंद किया है, तू हमेशा घर में लड़ाई-झगड़े करती रहती है न इसलिए..।’ इन्हें ...