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लुप्त होती-- सिर से आँचल व पैरों से पायल--मिथिलेश

बदन से सरकते कपड़े , जी हाँ आजके वर्तमान परिवेश में आपको आसानी से दिख जायेगा । अब ये आपको हर गली नुक्कड़ बाजार हो या शोपिग माल छोटे कपड़ो मे लड़कियां आपको आसानी से दिख जायेंगी । कल तक छोटे कपड़े रैंप पर कैटवाक करती मॉडल्स अपने डिजाइनर्स के कलेक्शन को पेश करने के लिए पहनती थीं लेकिन आजकल ऐसे कपड़े आम शहरी लड़कियाँ भी पहन रही हैं। जो दिखता है वही बिकता है की तर्ज पर अब लड़कियाँ भी बिंदास बाला की छवि में खुद को ढालती जा रही हैं और बेझिझक अपने मांसल सौंदर्य का प्रदर्शन कर लोगों की वाहवाही बटोर रही हैं। और हर जगह कहती फिरती है कि ये हमारा हक है । ठिक है हक और भी तो है तो क्या इस हक की जरुरत ज्यादा है इनकों । ऐसे कपड़ो में घुमती फिरती है और कहती है कि am i looking hot and sexy , और अगर आप ने हाँ कह दिया तो क्या हौसले और भी बुलंद । अभी कुछ दिनों पहले की बात है मै टी वी देख रहा था की अचानक मेरी नजर इड़िया टीवी पर पड़ी और देखा किसी अदालत नामक सीरियल पर पड़ी , जहाँ एक एपिसोड में एक कटघरे में स्वामी बाबा रामदेव थे औत दूसरे कटघरे में बोलीवुड की आइटम गर्ल समंभावना सेठ और कश्मिरा शाह थी । मुद्दा च...

मुक्तक आचार्य संजीव 'सलिल'

सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ मुक्तक आचार्य संजीव 'सलिल' राष्ट्र जमीं का महज न टुकडा, यह आस्था-विश्वास हमारा. तीर्थ, धर्म, मंदिर, मस्जिद, मठ, गिरजा, देवालय, गुरुद्वारा. भाषा-भूषा-भेष भिन्न हैं, लेकिन ह्रदय भिन्न मत मानो- कोटि-कोटि हम मात्र एक हैं, 'जय भारत माँ' सबका नारा. ********* सत्ता और सियासत केवल साधन, साध्य न इनको मानो. जनहित-राष्ट्रोत्थान एक ही लक्ष्य अटल अपना पहचानो. . संसद और विधानसभा में वाग्वीर जो पहुँच गए हैं- ठुकरा उनको, जन-सेवक चुन, जनगण की जय निश्चय जानो.. ********** देव, खुदा, रब, गौड, ईश्वर, गुरु, ऋषि भारत की संतान. भारत जग में सबसे ज्यादा पावन, सबसे अधिक महान. मंत्र, ऋचाएँ, श्लोक, आरती, आयत, प्रेयर औ' अरदास. वन्दन-अर्चन करें राष्ट्र का, 'सलिल' सतत का र्गौरव गान. ********* संसद मंदिर लोकतंत्र का, हुल्लड़ जनगण का उपहास. चला गोलियां मानव-द्रोही फैलाते नृशंस संत्रास. मूक रहे गर इन्हें न रोका, तो अपराधी हम होंगे- 'सलिल' सत्य यह, क्षमा न हमको देगा किंचित भी इतिहास. *********** 'बाजी लगा जान की, रोको आतंकी-हत्यारों को. असफल हुआ स...

नेपाल यात्रा - संजीव सलिल