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ग़ज़ल --जाने कहाँ गए ?

सीधे थे सच्चे सरल थे ,जाने कहां गए । कैसे बताएं क्या कहें ,दिल में समा गए। उनके सभी करम थे, हमारे ही वास्ते , क्या क्या न दुःख सुख घात जमाने के भा गए। प्रेमिल थी हर निगाह थी हर सांस में दुआ , लो याद आए अश्रु इन आंखों में आगये । सोचा था भूल जायेंगे ,हम साथ वक्त के, हर वक्त बनके वक्त ,मेरे साथ छागये । होकर के दूर भी वो हमसे दूर कब गए, जब जब भी चाहा 'श्याम हम इस दिल में पागये॥