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प्रभु (दशरथ) चावला की राम कहानी

आलोक तोमर कहानी अब नए-नए मोड़ लेती जा रही है। तत्कालीन पाकिस्तान के डेरा गाजीखान से दो साल का एक बच्चा विभाजन के दौरान शरणार्थी के तौर पर माता पिता के साथ भारत आया था। जमुना पार में झिलमिल कॉलोनी में परिवार को एक छोटा सा घर मिला। यह बालक अब प्रधानमंत्रियों और कैबिनेट सचिवों के साथ उठता बैठता है और दिल्ली के पुलिस कमिश्नर उसके फोन पर लगभग खड़े हो कर बात करते है। जानने वाले बताते हैं कि बच्चा बड़ा हुआ और देशबंधु कॉलेज, कालका जी से पढ़ाई करने के बाद पहले एक कॉलेज में पढ़ाया और फिर पत्रकार बन गया। ऐसे भी बहुत सारे लोग हैं जिन्होंने इस बच्चे यानी प्रभु चावला को झिलमिल कॉलोनी की रामलीला में दशरथ की भूमिका करते देखा था। लेकिन प्रभु चावला सिर्फ मंच तक ही दशरथ रह गए। बेटे अंकुर को राम नहीं बना पाए। सीबीआई की फाइलों में अंकुर चावला का नाम अमर उजाला दलाली प्रकरण के एक दलाल के तौर पर दर्ज है। अब आपको बताते हैं अमर उजाला की कहानी। 1948 मे ही जब प्रभु चावला माता पिता की गोद में सीमा पार कर के दिल्ली पहुंचे थे, आगरा में स्वर्गीय डोरी लाल अग्रवाल और स्वर्गीय एम एल माहेश्वरी ने मिल कर अमर उजाला ...

मौलिक प्रचार और टॉयलेट में विचार

दीपावली के मौके पर मल्टीप्लैक्स सिनेमाघरों के टॉयलेट्स में विधु विनोद चोपड़ा की 25 दिसंबर को प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ के विशेष स्टिकर लगाए गए हैं, जिनमें आमिर खान और दो सहयोगी कलाकार कमोडनुमा सीट पर बैठे हैं और उनकी पीठ कैमरे की ओर है। ज्ञातव्य है कि विगत वर्ष दीपावली पर शाहरुख खान अभिनीत फिल्म ‘रब ने बना दी जोड़ी’ के प्रदर्शन के समय आमिर खान की प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘गजनी’ में प्रयुक्त आमिर की विशेष हेयर स्टाइल के पोस्टर, पुतले और मॉडल भी सिनेमाघरों में प्रस्तुत थे। प्रचार के इस अनोखे ढंग की चर्चा फिल्म से ज्यादा हुई। आज के दौर में केवल अच्छी फिल्म बनाने के साथ फिल्मकार का काम समाप्त नहीं होता, वरन गहरे और व्यापक प्रचार की योजना भी क्रियान्वित करनी होती है। एक ऐसी लहर को जन्म देना होता है कि अधिकतम दर्शकों को लगे कि अगर यह फिल्म नहीं देखी, तो कुछ नहीं किया। आज दर्शक के पास मनोरंजन के अनेक विकल्प हैं और उसे लुभाना इतना आसान नहीं है। मार्केटिंग का विज्ञान बहुत विकसित है और इस क्षेत्र में देश के अव्वल दर्जे के दिमाग कार्यरत हैं। उन्हें अवाम के सपनों और...

जूजू इन मेकिंग....

वोडाफोन के जूजू विज्ञापन आजकल बहुत देखे और पसंद किए जा रहे हैं। आइ पी एल के पहले सीज़न के दौरान वोडाफोन ने 'हैप्पी टू हेल्प' सीरीज़ को, जिसका क्यूट डॉग भी सभी को भाया था, को लॉन्च किया था। अब आई पी एल के दूसरे सीज़न में जूजू कैरेक्टर ने धूम मचा दी है। टीवी के साथ-साथ ज़ू-ज़ू साइबर वर्ल्ड में भी धूम मचा रहे हैं। ज़ू-ज़ू फेसबुक में काफी लोकप्रिय हो चुका है। इसके करीब 65,000 हजार फैन्स बन चुके हैं। ज़ू-ज़ू कोई कंप्यूटर का कमाल नहीं हैं। असल में ये हरकतें स्पेशल कॉस्ट्यूम पहने कलाकार करते हैं। ज़ू-ज़ू को बनाने में करीब तीन हफ्ते का समय लगा। करीब 30 से ज्यादा लोगों की टीम ने इस प्रोजेक्ट पर काम किया। ज़ू-ज़ू के विज्ञापन की शूटिंग साउथ अफ्रीका में हुई है । ज़ू-ज़ू के विज्ञापनों की शूटिंग पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च हुए है। यहाँ हम आपको दिखा रहे हैं जूजू इन मेकिंग से कुछ ख़ास तस्वीरें.... आगे पढ़ें के आगे यहाँ

अध्यापक ने छात्रा से किया बलात्कार

सुंदरनगर. नेरी स्कूल के एक अध्यापक ने अपने ही स्कूल की छठी कक्षा की 12 वर्षीय छात्रा की इज्जत लूट ली। सोमवार को स्कूल के टीचर धर्मसिंह ने छात्रा को किसी काम के बहाने एक कमरे में बुलाया और बलात्कार किया। छात्रा ने डर के मारे यह बात परिजनों को नहीं नहीं बताई लेकिन अपनी सहपाठी छात्रा को इस प्रकरण के बारे में बताया। सहपाठी छात्रा ने इसकी जारी जानकारी उसके परिजनों को दी। थाना प्रभारी जगदीशचंद हंस ने बताया किपरिजनों की शिकायत पर मामला आगे पढ़ें के आगे यहाँ

हमें शिकायत करने का हक़ नही है...!!! भाग - २

आप लोगो ने पिछली पोस्ट पढ़ी थी अब मैं आपको शिकायत न करने की कुछ और वजह बताता हूँ..... रिश्वत देने मे और सिफारिश करने मे हम सबसे आगे होते हैं लेकिन जब अपना काम नही होता है तो कहते हैं की बहुत भर्ष्टाचार बढ़ गया है जिसको देखो रिश्वत मांग रहा है....बच्चे के पैदा होने से पहले उसका लिंग पता करने के लिए रिश्वत कुछ कहो तो कहते हैं की आगे तैयारी करने मे आसानी होती है, उसकी पैदा होने के बाद उसके जन्म प्रमाण - पत्र मे उसकी उम्र बदलवाने के लिए हम रिश्वत देते हैं, जब स्कूल में उसका दाखिला कराना होता है तो किसी अच्छे स्कूल में दाखिला कराने के लिए हम रिश्वत देते हैं चाहे हमारा बच्चा उस स्कूल की पढाई झेलने के लायक हो या नहीं हमें उससे कोई मतलब नहीं हैं, किसी खेल की टीम उसको खिलाने के लिए हम रिश्वत और सिफारिश सब कर लेते हैं, और हमारा बेटा खेल लेता हैं वो भी उस लड़के वो निकाल कर जो हमारे बच्चे से बहुत बेहतर खिलाडी है, चाहे जो करना पड़े खेलेगा हमारा बेटा, बच्चे ने साल बार पढाई नहीं में अब इम्तिहान में कैसे पास होगा लेकिन कोई बात नहीं तेअचेर को रिश्वत देकर किसी और से पेपर दिलवा देंगे, अगर यह नहीं हुआ तो क्ला...