किसी भी देश के इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं, जो निर्णायक होते हैं और उसकी किस्मत तय करते हैं। पाकिस्तान इस वक्त ऐसे ही दौर से गुजर रहा है। संकट के साये वैसे तो काफी दिनों से बढ़ रहे थे। साये जब छोटे होते हैं, तो मुंह चिढ़ाते हैं, लेकिन जब अपने कद से बड़े हो जाते हैं, तो डराने लगते हैं। पाकिस्तान में साये अब डराने लगे हैं। जेहादी आतंकवाद का खतरा अब पाकिस्तान के वजूद को खत्म करने पर आमादा है। जेहाद पाकिस्तान के लिए नया नहीं है। जनरल जिया उल हक के पहले से ही इसकी जमीन पाकिस्तान में पुख्ता थी। लेकिन जिया के सरकारी संरक्षण ने इसको नई जिंदगी दी। जिया के जमाने में इस्लामीकरण सरकार की राष्ट्रीय नीति हो गई। यह मामूली इस्लामीकरण नहीं था। जिया इसको समझते थे या नहीं, लेकिन सऊदी अरब से जो पैसा आया और उससे जिस तरह के मदरसे बने और उनमें जो पढ़ाई हुई, वह बेहद खतरनाक थी। सिर्फ पाकिस्तान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए। जिया उल हक की नीतियों की वजह से ही पाकिस्तान में कट्टरपंथियों ने मदरसों के जरिये अपनी जबर्दस्त पैठ बनाई। चार्ल्स एलेन अपनी किताब गॉड्स टेररिस्ट्स में लिखते हैं कि भारत के विभा...