'ट्रेन रोको आंदोलन'' सागर को रेल सुबिधा मुहैया करने की एक कोशिश है,लेकिन इसकी वास्तविकता और अनछुए पहलू पर नजर डाली जाये तो यह कदम हमें विकास से कुछ मिनिट या कुछ घंटे पीछे तो धकेल ही सकता है.सागर को विकास की जरुरत है और विकास के लिए आवश्यक होता है की आवाज़ उठाई जाए लेकिन वास्तव में आवाज़ उठाने का भी एक स्तर होता है,हमें अपने हितों से पहले ये देखना होता है की कही इससे किसी और के हितों पर आंच तो नहीं आ रही है, कल सागर के बाशिंदे मकरोनिया रेलवे स्टेशन पर रेलगाड़ी को रोककर रखेंगे चूकी मकरोनिया को रेल सुबिधा मुहैया करानी है ,होनी भी चाहिए क्या फर्क पड़ता है की अगर उस ट्रेन में कोई ऐसा व्यक्ति बैठा है जिसके पिता गुजर गए है,जिसकी माँ की हालत गंभीर है,किसी को ऑफिस जल्दी पहुंचना है और क्या फर्क पड़ता है की अगर किसी औरत की डिलीवरी होनी है और उसे अस्पताल पहुँचने की जल्दी है,जी नहीं सरकार कोई फर्क नहीं पड़ता. इस तरह के आंदोलन में देश के वो प्रभावशाली लोग शामिल होते है जिनके हाथ में संसद और विधानसभा तक की ताकत होती है और होनी भी चाहिए हमने आखिर इसी के ल...