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संपादकीयः दोमुंहे देशों की जोड़ी लड़ेगी तालिबान से?

तालिबान के साथ घमासान में पाक फौज को मिल रही सफलता पर अमेरिका इतरा रहा है। तालिबान अमेरिका के दुश्मन हैं जिसके खात्मे में उसके जवान शहीद नहीं हो रहे। यह लड़ाई पाकिस्तान अमेरिकी पैसों से लड़ रहा है। तालिबान पाक के भी दुश्मन हैं और धमाकों से परेशान पाक जनता भी अब यह समझ रही है। भारत भी खुश है कि पाकिस्तान आखिरकार तालिबान पर कार्रवाई कर रहा है। अफसोस ख़ुशी के ये दिन लंबे नहीं चलेंगे। कारण कि इस लड़ाई में सैद्धांतिक कमजोरी है। भूलना नहीं चाहिए कि जब तालिबान की कोपलें फूटीं, तब इसी खून से उसे सींचा गया था। वह मूर्त संगठन नहीं, एक सोच है जो विस्थापित अफगान पश्तूनों के बीच पनपी। उन पाक मदरसों में जो वहाबी संप्रदाय के पैसों से चलते थे। तब जमीन से बेदखल ये पश्तून शरणार्थी शिविरों में रह रहे थे। यहां मजहबी विचारधारा और पाक व अमेरिका द्वारा दी गई कलाश्निकोवों से लैस हुए और खून का बदला खून से लेकर काबुल में बैठ गए। पर बुरा हो खून के लज्जत की लत का। कब्जे में आने के बाद अफगानिस्तान मैदान नहीं रहा। लादेन ने फतह के लिए नई धरती दिखलाई। अमेरिकी सरजमीं पर अलकायदा के हमले के बाद से अमेरिका तालिबान का दुश...

बच्चों पर भारी कश की लत

भो पाल. सिगरेट के कश लेने में अब बच्चे भी पीछे नहीं हैं। 80 फीसदी बच्चे 18 साल की उम्र पूरी होने के पहले सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार बच्चों में सिगरेट पीने की प्रवृत्ति उनके अभिभावकों की आदतों से पनपती है। मनोचिकित्सकों के मुताबिक जिन बच्चों के परिवार में खुलेआम सिगरेट पीने, तंबाकू खाने का चलन है उन परिवारों के बच्चों के दिमाग का विकास सही तरीके से नहीं हो पाता। इसके चलते बच्चे अपने अभिभावकों की प्रत्येक अच्छी और बुरी आदत जल्द ही अपना लेते हैं। अभिभावकों की यही स्मोकिंग की आदत बच्चे को सिगरेट पीना सिखा देती है। शहर में पहचाने गए कैंसर रोगियों में कम उम्र में सिगरेट का नशा करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार कम उम्र में सिगरेट, तंबाकू का शौक करने वाले बच्चों को मुंह का कैंसर, गले का कैंसर जल्दी हो जाता है। पापा का घर में सिगरेट पीना लगता है बुरा शक्ति नगर निवासी मुकेश श्रीवास्तव के 14 वर्षीय पुत्र आयुष को पापा का घर में सिगरेट पीना बुरा लगता है। आयुष ने बताया कि पापा जब भी सिगरेट पीते हैं तो मैं उनसे नाराज हो जाता...

टयूबवैलों के भरोसे विश्व प्राकृतिक धरोहर - घना पक्षी विहार

राजीव शर्मा,भरतपुर जल ही जीवन है,जल है तो कल है, जैसी बातें दिनों दिन अब आम आदमी के सामने यक्ष प्रश्न बन कर सामने आ रही है । गर्मी के दिनों में इसकी किल्लत के चलते इंसान तो चक्का जाम , मटका फोड प्रदर्शन कर प्रशासन के सामने अपनी मॉग को पूरी करने के लिए मशक्कत करता दिखाई पड रहा है ।मगर जल केवल इंसानों के लिए ही जीवन नहीं है और इसके न होने से इंसानों का ही कल असुरक्षित होगा ऐसा भी नहीं है। इसका उतना ही संबंध जल के जीवों , आसमान के परिंदों के साथ जंगली जानवरों के लिए भी है ,जो किसी के पास जाकर अपनी मॉग नहीं रख सकते तो क्या इंसान इतना मतलबी हो गया है कि वो प्रकृति के इन अनुपम उपहारों की चिंता ही करना छोडता चला जा रहा है या फिर उसने, इनके लिए पानी की व्यवस्था को भी अपनी राजनीति की एक सीढी मात्र बना लिया है।इतना ही नहीं आम आदमी ने भी अपने घर के आस पास के पेडों पर हमेशा की तरह पानी के परींडे लगाना बंद कर दिया है जिनसे पक्षी अपनी प्यास बुझा लिया करते थे। राजस्थान को अन्रर्तराश्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाला केवलादेव घना पक्षी विहार अब अपने अस्तित्व के लिए संधर्ष करता नजर आ रहा है इसके प...

पानी की कमी --एक छप्पय -छंद

सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ छप्पय आयेगी वह सदी जब , जल कारण हों युद्ध , सदियों पहले भी हुए , जल के कारण युद्ध उन्नत मानव हुआ ,प्रकृति -सह भाव बनाया , कुए ,बावडी ,ताल बने ,जन मन हरषाया । निज हित में जो नाश प्रकृति का मनुज करता नहीं , जल कारण फ़िर युद्ध !यह बात सोच सकता कहीं ॥