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टीवी में ब्‍लैकमेलिंग का खेल, बीईए ने सुधीर को सजा दी

♦ रामबहादुर राय जी न्‍यूज के संपादक सुधीर चौधरी को उनके मालिकानों ने भले ब्‍लैकमेलिंग के एक बड़े आरोप से जरूर बरी कर दिया, लेकिन टीवी संपादकों के संगठन बीईए (ब्रॉडकास्‍ट एडीटर्स एसोसिएशन) ने उन्‍हें उनकी प्राथमिक सदस्‍यता से मुक्‍त कर दिया। यानी बीईए के मुताबिक सुधीर चौधरी दोषी हैं। इस मामले में प्रथम प्रवक्‍ता में छपा राम बहादुर राय की यह टिप्‍पणी गौरतलब है। साथ ही, हम बीईए की प्रेस रीलीज और सुधीर चौधरी की सफाई, दोनों ही प्रकाशित कर रहे हैं :  मॉडरेटर … Sudhir Chaudhary removed from primary membership of the BEA New Delhi, 18.10.2012 T he Executive Committee of the Broadcast Editors’ Association (BEA) met to discuss and consider the report of the three-member Fact Finding Committee, comprising Mr N. K. Singh, Mr Dibang and Mr. Rahul Kanwal, in the matter of the issues of professional ethics emanating out of the allegations leveled by Jindal Steel and Power Limited against Mr Sudhir Chaudhary, Treasurer, BEA and Editor, Zee News, on October 18, 2012. As the BEA ...

अनुराग की उड़ान के कुछ पुराने पन्ने.

   8 JULY 2010 बहस तो होती ही रहती है और बहस तो होती ही रहेगी। इस पूरी कवायद में ये हुआ कि अनुराग कश्‍यप थोड़े उघड़े। निर्देशक, सर्जक के रूप में हमने उन्‍हें पहले ही अपने वोट उन्‍हें दे रखे हैं, एक खुले इंसान और दोस्‍त की तरह हमारे बीच आकर उन्‍होंने बेतकल्‍लुफ बातचीत की – इससे उनका एक नया अंतरंग भी हमारे सामने उपस्थित हुआ। अभी उनकी फिल्‍म  उड़ान  आने वाली है। जैसा कि इस फिल्‍म की कहानी के बारे में कहा जा रहा है, ये उस किशोर की कहानी है जो जीवन के बारे में अपने फैसले खुद लेता है। कहा ये भी जा रहा है कि इसकी कहानी अनुराग के अपने जीवन से मिलती-जुलती है। मोहल्‍ला लाइव के पास अपने माता-पिता के नाम अनुराग की लिखी चिट्ठी हाथ लगी है, जिसमें उन्‍होंने अपने जीवन की दिशा को लेकर परिजनों को स्‍पष्‍ट संकेत दिया था। यह चिट्ठी अनुराग ने 1993 में लिखी थी :  मॉडरेटर चिट्ठी की एक कतरन हाल में एक एड फिल्‍म की शूटिंग के दौरान आदरणीय पापा एवं मम्मी जी, सादर प्रणाम, मैं यहां कुशलता से हूं  और आशा करता हूं कि आप मेरे लिए ज़्यादा चिंतित नहीं होंगे। मैंने अपना कार्य...

सिनेमा के सौ बरस पर बहसतलब, 23-24 को दिल्‍ली पधारें।

ती न साल पहले सिनेमा पर बहसतलब का सिलसिला शुरू हुआ था। फिल्‍म महोत्‍सवों की समृद्ध परंपरा के बीच सिर्फ बातचीत का एक आयोजन करने का विचार इसलिए भी आया था, क्‍योंकि सिनेमा देखना पहले की तुलना में अब बहुत आसान हो गया है। अब कोई भी फिल्‍म ऐसी एक्‍सक्‍लूसिव नहीं रह जाती है, जैसे पहले हुआ करती थी। इसलिए फिल्‍म महोत्‍सवों का पहले जितना क्रेज था, अब उतना नहीं है। कम से कम भारत में तो नहीं है। हमारी समझ थी कि जो सिनेमा बनाते हैं, उन्‍हें अपने सिनेमा और सिनेमा के अलावा अपने समय की दूसरी गतिविधियों के बारे में बातचीत करनी चाहिए। फिल्‍मकारों का  एक तेज-तर्रार समूह बहसतलब को समर्थन देने की मुद्रा में आ गया। अनुराग कश्‍यप, डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी और मनोज बाजपेयी एक तरह से संरक्षक की भूमिका में आ गये और जब भी मौका मिला, अपना कीमती समय बहसतलब के बारे में सोचने और बहसतलब के आयोजनों को संभव बनाने में लगाते रहे। पटना के आयोजन में पैसा जुटाने के लिए मनोज वाजपेयी ने एक जूते की दुकान के फीते काटे, एक होटल में जाकर शाम का खाना खाया और एक टेलीकॉम कंपनी के उपभोक्‍ताओं से एक घंटे तक बातचीत की। डॉक्‍ट ...

ताकि लाइव रहे मोहल्ला लाइव

By  संजय तिवारी   अविनाश दास असमंजस में हैं कि मोहल्ला की गलियां अवरुद्ध तो न हो जाएंगी? कोई चार साल पहले एनडीटीवी में काम करते हुए ब्लागिंग के जरिए इंटरनेट की दुनिया में प्रवेश करनेवाले अविनाश दास इन ब्लाग से उठकर वेबसाइट पर आये और जो जमात उन्होंने मोहल्ला पर विकसित की थी उस जमात के साथ अपने डोमेन पर बहस को जिन्दा रखा. विपक्ष की सास्वत आवाज बनाये रखी. लेकिन ब्लाग ब्लाग होता है और जब हम अपने डोमेन पर आते हैं तो वह वेबसाइट हो जाती है. और वेबसाइट की रेंज एक हजार रूपये से लेकर एक करोड़ सालाना तक कुछ भी हो सकती है. वैसे तो दूर अमेरिका के एक शहर सैन फ्रांसिस्को में बहस चल रही है कि वेब 2 की दुनिया कैसी होगी लेकिन यहां अपने देश में वेब 1 ही अभी तक आकार नहीं ले सका है. दशक की शुरूआत में जब पूरी दुनिया में इंटरनेट की क्रांति का पहला बबूला फूट रहा था तो भारतीय समाज इंटरनेट से आंखें चार करने को भी तैयार नहीं था. कुछ नामी गिरामी बड़ी कंपनियों ने पैसे जरूर लगाए लेकिन उस वक्त न तो नेट की समझ थी और न ही जरूरत तो जो उस पैसे को पैसे में बदलने में कारगर हो सके. इसी दौर में भारत में गूगल का प...