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डायरेक्ट दिल-से

डायरेक्ट दिल-से मेरा दिल है तू, ज़िगर भी तू...तू ही ज़िंदगी की सुबो-शाम है तू यकीं जो कर तो कहूं ये मैं, मेरे लब पे तेरा ही नाम है ------- वो जानते हैं नहीं कि ये आशिकी भी क्या चीज है... जो दिल मिले, तो तख्त क्या, सारी दुनिया ही नाचीज़ है ----------- अब आ भी जा, न बन संगदिल... बग़ैर तिरे सूनी है दिल की महफ़िल ------------- पत्थर हैं, उनकी हिम्मत है क्या जो आशिकी की राह में रोड़ा बनें... तू देख हमारी चाहतों की आग के आगे दम उनका निकल जाएगा --------------- शब-ए-ग़म का बोझ उठाके भी यारों हम जिए जाते हैं ... जो अश्क मोहब्बत में मिले हैं, उन्हें हंसके पिए जाते हैं -------------- जो पागल हुए, तो तू कहा...बस तेरी रहगुज़र की आरज़ू होश आने का सबब नहीं, मन में है इंतज़ार की जुस्तजू ---------- दीवानगी मुझ पे यूं कहर ढाएगी ये सोचा ना था, तू मेरी राह से होके गुज़र जाएगी ये सोचा ना था