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सितारों की प्रेस कांफ्रेंस का आंखों देखा हाल...

दिलनवाज/सुशील. खबरों के लिए मारामारी के इस दौर में फिल्मी सितारों की कांफ्रेंस की क्या अहमियत होती है। आप जानते ही हैं। हमारे पत्रकारिता जीवन की पहली कांफ्रेंस, हमारे उत्साह-उत्तेजना का आप अंदाजा भर लगा सकते हैं। कांफ्रेंस में हम पहुंच तो बड़े उत्साह से फिर लगा जो खबरें हमारे हाथ लगेंगी वो तो हमारे मीडियाकर्मी बाकी भाइयों के हाथों में भी जाने वाली हैं। हम यहां से क्या अलग, क्या एक्सक्लूसिव लेकर जाने वाले हैं। हम पर हमारा खुद का ही दबाव था कि कुछ अलग हटकर निकाला जाए...कुछ सूझ नहीं रहा था। आइडिए के लिए हमने आपस में ही सिर भिड़ाया, एकाएक एक आइडिया क्लिक कर गया...क्यों ना इसी प्रेस कांफ्रेंस की ही लाइव रिपोर्टिंग कर डाली जाए...किसी कांफ्रेंस की जितना लिखा, दिखाया जाता है उससे इतर वहां बहुत कुछ होता है, बताने को...फिर ये तो फिल्मी सितारों की कांफ्रेंस थी,बस हमने तय कर लिया आपको शब्द दर शब्द अवगत कराएंगे इस कांफ्रेंस के हर वाकए से... क्यों भई जब कैटरीन हो, रणबीर हो और प्रकाश झा भी हों तो और सामने हों ढेर सारे मीडियाकर्मी तो खबर से इतर कितना कुछ होता है जो खबर बन सकता है... घंटेभर पहले प...

अनुशासन हीन क्यों है पीढी ????

उछाले गये प्रश्न,  अनुशासन हीन क्यों है आ्ज की पीढी ? क्यों हें दूरियां,द्वन्द्व,अन्तर्द्वन्द्व- बच्चों व माता पिता में ? चुनते रहे पत्तियां, बच्चों पर हैं बडे दबाव,पढाई के ,ट्यूशन के, मां-बाप की आकान्क्षाओं के । ब्च्चों से सीखें मां- बाप, बच्चों को गुरू मानकर। ्बच्चों को सिर्फ़ पैसे सुविधा नहीं, अपना समय भी दें,मित्र बनें,पूरी बात सुनें ,समझें । बच्चे भी मां बाप की सुनने की बजाय , अपनी ही तानते हैं; ्टीचर व दोस्तों कि अधिक मानते हैं, टी. वी.,सिनेमा,इन्टर्नेट को अधिक पहचानते हैं । कौन जा पाया जड में -- आरहा है देश में, अवान्छित धन, योरोप,अमेरिका के जुआघरों, चकलाघरों,नन्गे नाच के क्लबों, आतन्क्बाद्व व ् निरीहों पर अत्याचार व- शस्त्रों की होड के पोषण के लिये, हथियारों की बिक्री की कमाई का । कभी बिकास के नाम पर,सहायता व कर्ज़, एवम एन.जी.ओ. प्रोजेक्ट या-- बहुराश्ट्रीय कम्पनियों ्के बिकास में लिप्त- हमें, मोटी-मोटी आमदनी, पे-पर्क्स, के रूप में । ""जैसा खायें अन्न, वैसा होगा मन। ""