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हमारे समय पर मजाकिया नजर है ‘पीपली लाइव’

पीपली लाइव एक काल्‍पनिक कहानी है दो भाइयों की, जो किसान हैं। फिल्‍म की शुरुआत में कर्ज न चुकाने की वजह से वे अपनी जमीन खोने वाले हैं। इसी दौरान उन्‍हें पता चलता है एक सरकारी योजना के बारे में, जो कहती है कि जो किसान कर्जे की वजह से आत्‍महत्‍या करता है, उसके परिवार को एक लाख रुपये दिये जाएंगे। यह सुन कर बड़ा भाई छोटे भाई को मनाता है कि वह आत्‍महत्‍या कर ले ताकि परिवार को एक लाख रुपये मिल जाएं। बड़ा भाई थोड़ा तेज है। छोटा भोला है, तो उस वक्‍त तो वह मान जाता है। उस समय इन दोनों को बिल्‍कुल अंदाजा नहीं है कि जो कदम वे उठाने जा रहे हैं, उससे उस गांव में क्‍या होने वाला है। यह फिल्‍म एक मजाकिया नजर है, हमारी सोसायटी पर, हमारे समाज पर, हमारे एस्‍टैबलिशमेंट पर, मीडिया या सिविल सोसायटी पर… यह मजाकिया नजर है हम सब पर… जिसमें एक चीज कहां से शुरू होती है और कहां तक पहुंचती है। हालांकि यह एक मजाकिया नजर है… यह फिल्‍म कुछ अहम चीज बता रही है… हमारे समाज के बारे में… हमारे देश के बारे में… आमिर खान मोहल्‍ला पर पिछले दिनों फिल्‍मों में आ रहे किरदारों और विषयों पर लंबी बहस चली। यह फिल्‍म सुकून देती है ...

दलित था, डराया गया, छोड़ दी मीडिया की नौकरी

यह सच्‍ची घटना है, लेकिन इनमें पात्र के नाम और उससे जुड़ी घटनाओं को हमने ब्‍लर कर दिया है। ऐसा करना हमने बाबा भारती और उनके घोड़े वाली कहानी से सीखा है। ♦ कृष्‍णकांत उसने पत्रकारिता छोड़ दी, क्योंकि अपनी जाति के कारण उसे बार-बार जलील होना गवारा नहीं था। वह भी लोकतंत्र के पहरुओं द्वारा, जो कहते हैं कि यह लोकतंत्र का महल हमारे ही दम से खड़ा है। हम न होते तो यह महल ढह जाता। उसने मुझसे कहा – हिंदू-मुस्लिम कठमुल्लों को गाली देना मीडिया में फैशन है। ठीक उसी तरह जैसे सलमान खान की नयी रिलीज हो रही फिल्म की खबर देना। यह महज ढोंग है। मीडिया भी उतना ही सांप्रदायिक है जितना कि बजरंग दल या कोई जेहादी कठमुल्लों का संगठन। मैं किसी कथित निचली जाति में पैदा हुआ तो मेरा क्या दोष? आप कथित ब्राहमण के घर पैदा हुए तो आपकी उपलब्धि क्या है? यह कोई गल्प नहीं है। यह पूरब के ऑक्सफोर्ड से पत्रकारिता की पढ़ाई करके निकले एक छात्र की आपबीती है, जो इत्तफाक से ब्रहमा के मुख से नहीं पैदा नहीं हुआ है। पीआरओशिप में बदल चुकी पत्रकारिता की पढ़ाई भी उसे इस थोपे हुए ब्राहमण-शूद्रवाद से लड़ने का साहस नहीं दे सकी। ...