डॉ. जेन्नी शबनम हमारी समूह सम्पादक डॉ जेन्नी शबनम आजकल अनाथालयों के दौरे कर रही है ,बकौल डॉ शबनम अनाथालय शब्द ही अमानवीय है ,इस दौरे के दौरान उन्होंने अनाथ बच्चों के मनोविज्ञान और उनकी मनोदशा जानने की कोशिश की है ,आज प्रस्तुत है “नाथनगर के अनाथ ” का दूसरा भाग… श्री अशोक मेहरा जो इस अनाथालय के सचिव हैं से बातें हो रही थी तभी एक छोटा लड़का पापा पापा करते हुए आया और उनकी गोद में बैठ गया, मैं पूछी ”ये आपका बेटा है”? अशोक जी जो पितातुल्य हैं बड़े गर्व से कहते हैं ”मैडम, मैं यहाँ इन सबका पिता हूँ, सभी बच्चे मुझे पापा हीं कहते हैं”| उन्होंने बताया कि यहाँ जो सेविका है उसे बच्चे ”माँ” कहते हैं और ये परंपरा शुरू से हीं है| हम सभी के चेहरे पे संतोष की लहर सी दौड़ गई| मन ख़ुश हुआ कि यहाँ कोई बच्चा अनाथ नहीं है| सभी बच्चों का नामकरण ये ख़ुद हीं करते हैं और सभी के नाम के साथ ”भारती” लिखा जाता है क्योंकि ये सभी भारत की संतान हैं| उन्होंने बताया कि यहाँ जो भी बच्चे आते हैं किसी की जाति या धर्म का पता नहीं होता| जब जो मिल गया उसे हम लोग रख लेते हैं, थाना में इतिल्ला कर आवश्यक कारवाई पूरी कर दी ...