जितना दूर जाता हूँ , उतना पास पाता हूँ। तेरे बिन क्या होता है, तुमको आज बताता हूँ। तेरे गीतों की सरगम , मन-वीणा पर गाता हूँ। कलछा चिमटे चकले पर , सुर लय ताल मिलाता हूँ। तुम्हें भुलाना चाहूँ तो, यादों में उतराता हूँ। गज़लें लिखना चाहूँ तो , काफिया भूल जाता हूँ। तुम भी करते होगे याद, ख़ुद पर ही इतराता हूँ। अबतो आही जाओ 'श्याम, वरना मैं आजाता हूँ॥