ज ब किसी कक्ष की खिडकी बन्द होती है। तो घुटन का अनुभव होता है। प्रकाश कि एक भी किरण वहॉ नही उतर सकती॥ कुछ बहिनो ने अपने चारो और हल्के पन कि दिवारे खड्डी कर ली है। उन्ह मे दिवारो से परे झॉकने कि क्षमता भी नष्ट हो चुकि है। जैसे अपराध करने वाले कैदि का बहार से सम्बन्ध टुट जाता है वैसे ही कुछ अव्यवारिक, अभद्र्, विचारो वाले मनुष्य ने {नारी कटरपन्थी} चारो और फैले सत्य के प्रकाश से ऑखे मून्द लेते है। अपने खराब चरित्र का स्वय प्रस्तुति दे जाते है। क्या अभद्र भाषा सत्य को झुटला सकती है ? को ई भी व्यक्ती अपनी निच प्रवृति से महान बनने कि कोशिश उसे एवम उसके आसपास के समाज को ले डूबती है। मेरे विचार जो मैने स्कुल मे मेरी मेडम अध्यापक से सिखा,वो हमेशा कहा करती थी कि लडकियो को पुरे कपडे पहनने चाहिये। तो क्या मेरी महिला टिचर भी घटियॉ स्तर कि सोच रखती थी ? मैने बहुधा माताओ से यह कहते हुये सुना कि " बेटि कपडे सलिकेदार ही पहनो तो क्या सभी कि मॉ भी घटियॉ स्तर कि सोच कहा जाएगा ? मैने बहुत बडी बडी महिला चिन्तको, लेखको, समाजसेविकाओ को देखा ,पढा, सुना सभी ने यही कहॉ लडकियो को अपनी पहनावे को ...