कुछ मुक्तक संजीव 'सलिल' दोस्तों की आजमाइश क्यों करें? मौत से पहले ही बोलो क्यों मरें.. नाम के ही हैं. मगर हैं साथ जो- 'सलिल' उनके बिन अकेले क्यों रहें?. * दोस्तों की आजमाइश तब करें. जबकि हो मालूम कि वे हैं खरे.. परखकर खोटों को क्या मिल जायेगा? खाली से बेहतर है जेबें हों भरे.. * दोस्तों की आजमाइश वे करें. जो कसौटी पर रहें खुद भी खरे.. 'सलिल' खुद तो वफ़ा के मानी समझ- बेवफाई से रहा क्या तू परे? Acharya Sanjiv Salil http://divyanarmada.blogspot.com