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मौलिक प्रचार और टॉयलेट में विचार

दीपावली के मौके पर मल्टीप्लैक्स सिनेमाघरों के टॉयलेट्स में विधु विनोद चोपड़ा की 25 दिसंबर को प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ के विशेष स्टिकर लगाए गए हैं, जिनमें आमिर खान और दो सहयोगी कलाकार कमोडनुमा सीट पर बैठे हैं और उनकी पीठ कैमरे की ओर है। ज्ञातव्य है कि विगत वर्ष दीपावली पर शाहरुख खान अभिनीत फिल्म ‘रब ने बना दी जोड़ी’ के प्रदर्शन के समय आमिर खान की प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘गजनी’ में प्रयुक्त आमिर की विशेष हेयर स्टाइल के पोस्टर, पुतले और मॉडल भी सिनेमाघरों में प्रस्तुत थे। प्रचार के इस अनोखे ढंग की चर्चा फिल्म से ज्यादा हुई। आज के दौर में केवल अच्छी फिल्म बनाने के साथ फिल्मकार का काम समाप्त नहीं होता, वरन गहरे और व्यापक प्रचार की योजना भी क्रियान्वित करनी होती है। एक ऐसी लहर को जन्म देना होता है कि अधिकतम दर्शकों को लगे कि अगर यह फिल्म नहीं देखी, तो कुछ नहीं किया। आज दर्शक के पास मनोरंजन के अनेक विकल्प हैं और उसे लुभाना इतना आसान नहीं है। मार्केटिंग का विज्ञान बहुत विकसित है और इस क्षेत्र में देश के अव्वल दर्जे के दिमाग कार्यरत हैं। उन्हें अवाम के सपनों और...

गीतिका : आचार्य संजीव 'सलिल'

चल पड़े अपने कदम तो,मंजिलें भी पायेंगे. कंठ-स्वर हो साज़ कोई, गीत अपने गायेंगे. मुश्किलों से दोस्ती है, संकटों से प्यार है. 'सलिल' बनकर नर्मदा हम, सत्य-शिव दुहारायेंगे. स्नेह की हर लहर हर-हर, कर निनादित हो रही. चल तनिक अवगाह लें, फिर सूर्य बनकर छायेंगे. दोस्तों की दुश्मनी की 'सलिल' क्यों चिंता करें. दुश्मनों की दोस्ती पाकर मरे- जी जायेंगे. चुनें किसको, तजें किसको, सब निकम्मे एक से. मिली सत्ता तो ज़मीं से, दूर हो गर्रायेंगे. दिल मिले न मिलें लेकिन हाथ तो मिलते रहें. क्या पता कब ह्रदय भी हों एक, फिर मुस्कायेंगे. स्नेह-सलिला में नहाना, 'सलिल' का मजहब धरम. सफल हो श्रम साधना, हम गगन पर लहरायेंगे.