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हिन्दी , हिन्दुस्तान का यही तो दर्द है, दोहरी चाल ----डा श्याम गुप्त

---अब आप युवा कांग्रेस में भरती होने के इस विज्ञापन के फ़ार्म को देखिये --निर्देश संख्या १ पर है---आवेदन पत्र को केवल अंग्रेज़ी में भरें , और अंत में निर्देश ५ है कि आप हिन्दी भाषा में भी भर सकते है | अब केन्द्र में सत्तारूढ़ पार्टी ( जो देश में अधिकतम समय सत्तासीन रही है )के युवा सदस्यता का मापदंड ही दोहरा है | हिन्दी भाषा तो निचले पायदान पर ही है, तो फ़ार्म तो सिर्फ़ अंग्रेज़ी मेंही भरना है क्योंकि ये युवा नेता वास्तव में तो अंग्रेज़ी में ही खाते, पीते, उठते ,बैठते,पढ़ते लिखते हैं , हिन्दी तो बस गाँव की जनता को दिखाने को ही बोलते हैं, हिन्दी का नाम तो बस लीपी-पोती है | क्या आशा-अपेक्षा करे देश व जनता व भविष्य - एसे युवा नेता,एसे युवाओं , युवाओं की पार्टी , मुख्य पार्टी,व सरकार से ?? -----हम सब सोचें , विचारें --क्या होगा हिन्दी का ?????!!!!!

सेक्स बेचा जाता है लेकिन यहां नहीं...

नई दिल्ली. दिल्ली में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी भले ही रफ्तार न पकड़ पा रही हो लेकिन यहां पर कॉलगर्ल की तैयारी जोर पकड़ने लगी है। दिल्ली में लड़कियों की संख्या में 50 फीसदी तक की कमी आ गई है जिसे पूरा करने के लिए मुंबई, बेंग्लोर और पूणे से भारी संख्या में लड़कियों को मंगाया जा रहा है। यह तो जगजाहिर है कि ऐसे खेल के आयोजन के दौरान लड़कियों की डिमांड भी बढ़ जाती है। और दलाल अच्छा पैसा कमाने के लिए ऐसे समय दोगुने दाम की मांग करते हैं। सबसे बड़ी बात बाहर से आने वाले मेहमानों में यह डिमांड सबसे ज्या दा रहती है। वे खेल का भरपूर मजा तो लेते ही हैं साथ में अपनी शारीरिक भूख भी मिटाते हैं। एक प्रमाण के मुताबिक जब भी इस प्रकार के खेल का आयोजन होता है उस समय कंडोम की बिक्री में भी एकाएक इजाफा हो जाता है। बीते वर्ष चीन में संपन्न हुए ओलंपिक खेल में एक लाख से ज्यादा कंडोम की बिक्री हुई थी, जिससे यह तो साफ हो जाता है कि ऐसे समय में लड़कियों की संख्या एकाएक बढ़ जाती है। वहीं दूसरी तरफ हम खेल का आयोजन इसलिए करते हैं जिससे दो देश अथवा अलग-अलग देश एक दूसरे के और नजदीक आ सकें, दो देशों के बीच आपसी...

नई सरकार गठन --मजबूर जन-जन

जनता तो सदैव ही मजबूर है सिर्फ़ वोट देने के लिए , आगे मंत्री, पद,कार्य समिति, शासन आदि में तो न पहले कोई उसे पूछता था न अब लोकतंत्र में वोट के बाद तो खरीद फरोख्त पर भी कोई ध्यान नही देता वही ""कोऊ नृप होय हमें का हानीं । "" वही चहरे घूम घूम कर -जो मुद्दतों से कोई गुणात्मक कार्य नही कर पाये -आजाते हैं जो करेंगे वही मानने, कराने, भुगतने को तैयार रहें। सदा की तरह । यथा स्थिति वाले लोग आगये।