कर्म करना धर्म मानते गर्मी धुप को सहते है॥ तन से आग निकल रही है॥ अपने पथ पर चलते है,, मन में एक आश झलकती कब होगा मेरा पूरा काम॥ अपने को अर्पण किए चलते रहते वीर जवान॥ मरने का डर इन्हे नही है॥ ये है मेरे देश के रक्षक मिट जायेगे देश के खातिर नही बनेगे ख़ुद के भक्षक नाम रखेगे देश का अपने लड़ते लड़ते मर जायेगे॥ ये वीर जवानो की टोली है,, जाते जाते कुछ दे जायेगे॥ भारत देश के रहने वाले इनको तुम प्रणाम करो॥ जान निछवर कर गए है॥ इनको लल्ला सलाम करो॥