भावना सोमाया जब कोई फिल्म चलती है तो कोई भी उसकी सफलता के कारण की पड़ताल करने की परवाह नहीं करता, लेकिन फिल्म के पिट जाने पर सभी समीक्षक बन जाते हैं। रावण के साथ यही हो रहा है। समीक्षक फिल्म की कहानी, रणनीतिकार फिल्म के प्रचार और दर्शक फिल्म के चरित्र चित्रण को दोष दे रहे हैं। दर्शकों और फिल्म जगत को मणिरत्नम की फिल्म से बहुत उम्मीदें थीं। लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब कोई अतिप्रचारित फिल्म पिट गई हो। यह बड़े-बड़े फिल्मकारों के साथ भी हो चुका है। राज कपूर की मेरा नाम जोकर, यश चोपड़ा की सिलसिला और लम्हे, बोनी कपूर की रूप की रानी, चोरों का राजा, सुभाष घई की यादें, अमिताभ बच्चन की मृत्युदाता.. सभी इसी श्रेणी में आती हैं। कुछ लोग नाकामी के दौर से गरिमा के साथ बाहर आते हैं। कुछ खामोशी से इसका सामना करते हैं तो कुछ इसे चुनौती की तरह लेते हैं। अमिताभ बच्चन ने यही किया था, जब कौन बनेगा करोड़पति से उन्होंने जोरदार वापसी की थी। वे भले ही अपनी निजी जिंदगी में बहुत ज्यादा शब्दों का इस्तेमाल नहीं करते हों, लेकिन सदाशय प्रतिक्रियाएं देने में वे कभी पीछे नहीं रहे। 70 के दशक में अपनी एक सहकलाकार के अ...