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Showing posts with the label उपन्यास

मेरे अच्छे दोस्त जॉर्ज

जॉर्ज फर्नाडीज के लिए मेरे दिल में सदैव एक स्थान रहा है। मैं उन्हें पिछले करीब 40 सालों से अलग-अलग रूपों में जानता हूं। उनमें वह सबकुछ था, जो मुझमें नहीं था। अपनी पहली ही मुलाकात के दौरान मैंने उन्हें ऐसे आकर्षक गठीले युवक के रूप में पाया जिसमें जीवन जीने का उत्साह कूट-कूटकर भरा हुआ था। इसी वजह से कई सुंदर महिलाएं उनके प्रति आकर्षित हुईं। उधर मैं एक थुलथुल सरदार। जॉर्ज को मैंने पहली बार तब देखा था, जब वे ग्रीष्मकाल की एक तपती दोपहरी में काला घोड़ा चौक स्थित एक छोटे से मंच पर खड़े होकर मुंबई के सैकड़ों कैब चालकों को अपने हक के वास्ते संघर्ष करने के लिए प्रेरित कर रहे थे। उसी शाम को मैं उनसे एक कॉकटेल पार्टी में मिला। उस पार्टी में वे आभूषणों से लदे मुंबई के भद्रजनों के आकर्षण का केंद्र बन गए थे। वे उन लोगों से उतनी ही सहजता से बातचीत कर रहे थे, जितनी सहजता से वे दोपहर में टैक्सी ड्राइवरों को संघर्ष के लिए ललकार रहे थे। हम दोनों जो एक बात साझा करते थे, वह यह थी कि हमें सभी धर्मो से चिढ़ थी। वे कैथोलिक धर्म में पैदा हुए थे, लेकिन उसका अनुसरण उन्होंने कभी नहीं किया। मेरा उनसे नाता थोड़े सम...

क्यूं हर बार रैंप पर ही कपड़े नहीं देते साथ

दुनिया में कहीं भी फैशन शो हो और उसमें कोई विवाद न उठे ऐसा कैसे हो सकता है। नई दिल्ली इन दिनों चल रहे विल्स लाइफस्टाइल इंडिया फैशन शो भी इससे अछूता न रहा। मशहूर डिजाइनर रितु कुमार के शो के दौरान खूबसूरत मॉडल जब रैंप पर उतरीं तो सभी की निगाह उनके पैंट पर जा कर टिक गई। नजर टिकने की भी पुख्ता वजह थी। दरअसल मॉडल ने जो पैंट पहन रखा था, उसकी चैन बंद करना शायद वो भूल गई थी। ऐसा नहीं है कि यह देश में कोई पहला मामला है। पहले भी कई फैशन शो इन्हीं तरह की लापरवाहियों के चलते सुर्खियां बटोर चुके हैं। हालांकि इस बात पर बहस आज भी जारी है कि ऐसा अनजाने में हो जाता है या फिर जानबूझकर किया जाता है।वर्ष 2008 में विल्स फैशन शो के दौरान एक मॉडल की ड्रेस जब कंधे से खिसक गई तो उसने उस पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया और पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर चलती रहीं। इससे पहले वर्ष 2006 में तो हद हो गई थी। देश की मशहूर मॉडल केरोल ग्रेसिया जब रैंप पर उतरीं तो कैमरे का फ्लैश लगातार उन्हीं की ओर चमक रहे थे। चमकते भी क्यों नहीं। केरोल ने जो ड्रेस पहनी हुई तो वह अचानक खुल गई। लेकिन दाद देनी होगी कैरोल की। उन्होंने पूरे ...

अभिज्ञात को दिया जायेगा कौमी एकता पुरस्कार

कोलकाता - 'आल इंडिया कौमी एकता मंच' की ओर से अभिज्ञात को उनके उपन्यास 'कला बाजार' के लिए 'कौमी एकता पुरस्कार' देने का निर्णय लिया गया है। यह उपन्यास सन 2008 में आकाशगंगा प्रकाशन, नयी दिल्ली ने प्रकाशित किया है। 9 मई सन् 1857 को स्वतंत्रता संग्राम का ऐतिहासिक दिन है। उसकी वर्षगांठ पर 9 मई 2009 को यह पुरस्कार कोलकाता के कला मंदिर सभागार में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया जायेगा। यह जानकारी मंच के महासचिव आफताब अहमद खान ने दी है। उन्होंने बताया कि 'कला बाजार' उपन्यास में विभिन्न धर्मों से जुड़े चरित्र एक-दूसरे की भावनाओं का जिस तरह से खयाल रखते हैं उससे हमारी कौमी एकता और साम्प्रदायिक सद्भाव को बल मिलता है। अभिज्ञात को इससे पहले 'आकांक्षा संस्कृति सम्मान' एवं एचडी मीडिया समूह का 'कादम्बिनी लघुकथा पुरस्कार' मिल चुका है। उनके छह कविता संग्रह 'एक अदहन हमारे अन्दर', 'भग्न नीड़ के आर पार', 'आवारा हवाओं के खिलाफ चुपचाप', 'वह हथेली' तथा 'दी हुई नींद' एवं दो उपन्यास 'अनचाहे दरवाज़े पर' और ' ...