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kriti charcha / book review: acharya sanjiv verma 'salil'

ॐ कृति चर्चा: बिजली का बदलता परिदृश्य : कमी कैसे हो अदृश्य? चर्चाकार : संजीव * [कृति विवरण : बिजली का बदलता परिदृश्य, तकनीकी जनोपयोगी, इंजी. विवेक रंजन श्रीवास्तव 'विनम्र', आकार डिमाई, आवरण बहुरंगा पेपरबैक, पृष्ठ १००, मूल्य १५० रु., जी नाइन पब्लिकेशन्स रायपुर छतीसगढ़ ] *                                     भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् भी मानसिक गुलामी समाप्त नहीं हुई। फलतः राजनैतिक आज़ादी दलीय द्वेष तथा सत्ता प्रतिष्ठान के स्वार्थों की हथकड़ी-बेदी में क़ैद होकर रह गयी। जनमत के साथ-साथ जनभाषा हिंदी भी ऊंचे पदों की लालसा पाले बौने नेताओं की दोषपूर्ण नीतियों के कारण दिनों-दिन अधिकाधिक उपेक्षित होती गयी। वर्तान समय में जब विदेशी भाषा अंग्रेजी में माँ के आँचल की छाया में खेलते शिशुओं का अक्षरारंभ और विद्यारम्भ हो रहा है तब मध्य प्रदेश पूर्वी क्षेत्र विद्युत् वितरण कम्पनी जबलपुर में अधी...

book review: novel: mujhe jeena hai critic acharya sanjiv verma 'salil'

कृति चर्चा: मानवीय जिजीविषा का जीवंत दस्तावेज ''मुझे जीना है'' आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' * (कृति विवरण: मुझे जीना है, उपन्यास, आलोक श्रीवास्तव, डिमाई आकार, बहुरंगी सजिल्द आवरण, पृष्ठ १८३, १३० रु., शिवांक प्रकाशन, नई दिल्ली) *                                     विश्व की सभी भाषाओँ में गद्य साहित्य की सर्वाधिक लोकप्रिय विधा उपन्यास है। उपन्यास शब्द अपने जिस अर्थ में आज हमारे सामने आता है उस अर्थ में वह प्राचीन साहित्य में उपलब्ध नहीं है। वास्तव में अंगरेजी साहित्य की 'नोवेल' विधा हिंदी में 'उपन्यास' विधा की जन्मदाता है। उपन्यास जीवन की प्रतिकृति होता है। उपन्यास की कथावस्तु का आधार मानवजीवन और उसके क्रिया-कलाप ही होते हैं। आलोचकों ने उपन्यास के ६ तत्व कथावस्तु, पात्र, संवाद, वातावरण, शैली और उद्देश्य माने हैं। एक अंगरेजी समालोचक के अनुसार- 'आर्ट लाइज इन कन्सीलमेंट' अर्थात 'कला दुराव में है'। विवेच्य औपन्यासिक कृति 'म...

रामदेव का राजनीतिक रंग

अब बाबा रामदेव अपने असली रंग में दिख रहे हैं. बात करते हैं तो बार बार उत्साह को बनाये रखने की सलाह देते हैं. जयपुर, दिल्ली और जोधपुर में तीन सभाओं के दौरान उन्होंने कमोबेश एक बात ही कही कि राष्ट्रीय स्वाभिमान आंदोलन को आगे बढ़ाना है और "चोर" "लुटेरे" "डाकुओं" से देश को मुक्त कराना है. यह विशेषण बाबा रामदेव किसके लिए इस्तेमाल कर रहे हैं यह बताने की जरूरत नहीं है. ये चोर लुटेरे और डाकू कोई और नहीं बल्कि इस देश के वही नेता हैं जिन्हें अपने योग शिविरों में बुलाकर रामदेव अपना कद बढ़ाते रहे हैं. मैंने कहा बाबा रामदेव अब अपने असली रंग में हैं. थोड़ा वक्त लगा लेकिन वे आखिरकार देश को सुधारने और देश का स्वाभिमान जगाने निकल ही पड़े. आस्था टीवी चैनल पर कनखल के आश्रम से जब उन्होंने पहली बार अपने योग शिविर का लाईव प्रसारण शुरू किया था संयोग ही है कि वह लाईव प्रसारण भी मैंने टीवी पर देखा था. कुल जमा दो तीन सौ लोग होते थे. कुछ दिनों तक बाबा ने यहीं से योग शिविर चलाया लेकिन अचानक ही जैसे योग क्रांति ने जन्म ले लिया. इसलिए बाबा ने बड़े शिविर आयोजित करने शुरू कर दिये. ...

कृति चर्चा: Contemporary Hindi poetry:

कृति चर्चा: Contemporary Hindi poetry: (A selection of Modern Hindi poems translated in English) Editor & Translator: Bhagvat Prasad Mishra 'Niyaz' Pages: 197, Price Rs. 300/- Sat Sahitya Prakashan, FF4/B Block, Sun Power Flats, Mem Nagar, Ahmedabad 380052 * 'The present collection of Contemporary Hindi poems is a bouquet of different variety of flowers both in colour and fragrance fresh from the Hindi garden. Hindi poetry today is not the old, traditional, formal and ornamental poetry. However, umlike west it still maintains it's lyricality through it's internal rhythm. But you can'nt charge it with coservatism. It is much modern because both in form and content, it has broken the shackles of set metafers and similies and created new ones. What is most noteworthy is the return of the lyricin the form of songs, ghazals, new lyric and couplets. Though translation is not original poetry but the spirit is there throbbing in every word and li...