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Short Love story By Sanjay sen sagar

यूँ तो वो भीड़ भाड़ में जाने से बचने लगा था लेकिन जब किसी काम से वो मॉल पहुंचा तो बिलकुल वही हुआ जिसका उसे डर था। उसकी विशाखा उसे आज फिर दिख गयी। माफ़ कीजिये विशाखा तो अब उसकी रही ही नहीं थी वो किसी और की हो चुकी थी।  कितना अजीब था कुछ महीनो पहले ही विशाखा और वो हर रोज इसी मॉल में घूमने आते,मूवी देखते और ज़िंदगी को लेकर नए नए सपने बुनते रहते।सालों से चलता आ रहा यह किस्सा उस दिन थम गया जब विशाखा के पि ताजी की हार्ट अटैक से मौत हो गयी और उसके रिश्तेदारों ने अपनी जिम्मेदारी निभाने के नाम पर कुछ दिनों में ही उसकी शादी कर दी।उसे तो तब तक यकीन नहीं हुआ था जब तक की विशाखा ने उसके हाथों में अपनी शादी का कार्ड थमा नहीं दिया। उसे यकीन था की विशाखा बस उसकी है और वो शादी नहीं करेगी,पर विशाखा के हाँथ में में कुछ था ही नहीं। सबसे बुरा जो हुआ वो यह की विशाखा की शादी इसी शहर में हुई थी। जब अनजाने में वो पहली बार विशाखा से इसी मॉल में टकराया तो जैसे जान ही निकल गयी,विशाखा के हाँथ को उसके पति ने थामा हुआ था। यह देखकर उसे ऐसा अहसास हुआ जैसे किसी ने उसकी रूह को उससे छीन लिया हो। उस रात का दर्द जैसे उसकी ...

शार्ट लव स्टोरी - स्कूटर नंबर 4466

वो चेहरे से बड़ा ही गुस्से वाला नजर आता था  |  बात करने के मामले में भी एक दम शांत सा |लोगों को यकीन नहीं होता था की यह उनके कॉलेज के छात्र संगठन का अध्यक्ष है क्योंकि राजनीति करने वाले तो बेवजह भी बोलते रहते है जबकि यह जनाब तो जरूरत पर भी बहुत कम ही बोला करते थे| हाँ कॉलेज में किसी का काम नहीं रुक सकता था| हर काम के लिए,हर रुकावट के लिए सबसे पहले खड़े हो जाने की खूबी थी| उसके इतने सख्त रवैये से तो उसके दोस्त भी बेहद परेशान रहते थे| उन्हें लगता था की ना तो वो लड़कियों के चक्कर में पड़ता है,ना हमें पढ़ने देता है उसके दोस्तों के हिसाब से वो सबकी जवानी बर्बाद करवा रहा था,जबकि उसके लिए यह संस्कार और अपने उसूलों को ज़िंदा रखने वाली बात थी|   कॉलेज का जब नया सत्र शुरू हुआ तो स्टूडेंट्स की भीड़ भाड़ के साथ ही अध्यक्ष साब का कम भी बढ़ गया था| कोई कहता सीट फुल है तो एडमिशन करा दो,किसी को फीस माफ़ करानी होती| कॉलेज के प्रिंसिपल से ज्यादा बंदोबस्त इन्हे ही करना होता था| इतने सख्त भावों वाला इंसान अंदर से वाकय इतना कठोर नहीं था यह उस दिन पता चला| जब एक रेस्ट्रो में अपनी फ्रेंड की...

शार्ट लव स्टोरी - यू आर माय अदनान सामी

संजय सेन सागर  उसके मम्मी पापा के प्यार का नतीजा ही था की उसका वजन सौ किलो से ज्यादा हो चुका था| रंग एक दम गोरा और मोटे मोटे से गाल,वो किसी को भी स्वीट या क्यूट लग सकता था | आइसक्रीम,पिज़्ज़ा और फ़ास्ट फ़ूड से उसका प्यार इतना की बस मानो उसे सब मिल गया |  वो जितना स्वीट था,उसका नाम उसकी स्वीटनेस को और ज्यादा बड़ा देता था ''रिदम'' नाम था उसका| रिदम् की कई सालों से बस एक ही दोस्त थी तान्या| जो रहती भी उसके अपार्टमेंट के पास ही थी और क्लास में बैठती भी बिलकुल उसके बगल में ही थी| तान्या जब भी फुर्सत में होती या क्लास में बोर होती वो रिदम् के गालों को दबा दबाकर अपना टाइम पास करती रहती | रिदम् को भी तान्या पिज़्ज़ा और आइसक्रीम तक से ज्यादा पसंद थी| उसे तान्या का इस तरह से परेशान करना बिलकुल भी बुरा नहीं लगता था| इसी तरह दो साल गुजरे तो रिदम को लगा की तान्या में कुछ बदलाव आ रहा है,वो पहले की तरह ना तो रिदम के साथ बात करती थी ना उसके साथ पहले की तरह हंसी मजाक करती है| पहले तो रिदम और तान्या साथ में एनिमेटेड मूवी देखा करते थे,गेम खेला करते थे पर अब जैसे तान्या ने यह ...