पास भी है किन्तु कितने दूर है । आपकी चाहों से भी अब दूर हैं | आप चाहें या नहीं चाहें हमें , आप इस प्यासी नज़र के नूर हैं | आप को है भूल जाने का सुरूर , हम भी इस दिल से मगर मज़बूर हैं | चाह कर भी हम मना पाए नहीं , आपसे समझे यह कि हम मगरूर हैं | आपको ही सिर्फ यह शिकवा नहीं , हम भी शिकवे-गिलों से भरपूर हैं | आप मानें या न मानें 'श्याम हम, आपके ख्यालों में ही मशरूर हैं || -------- डा. श्याम गुप्त