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‘समर्थन’ और ‘विरोध’ का सीरियल

श्रवण गर्ग Sunday, July 05, 2009 सरकारों द्वारा की जाने वाली घोषणाओं को लेकर विपक्षी दलों की प्रतिक्रियाएं स्टाक माल की तरह तैयार रहती हैं। आम जनता को भी पूरा आभास रहता है कि पक्ष और विपक्ष के ऊंट किस करवट बैठने वाले हैं। ममता बनर्जी द्वारा शुक्रवार को लोकसभा में पेश किए गए रेल बजट को अगर विपक्षी दलों ने सतही, निराशाजनक और परिकथाओं वाला और कांग्रेसी खेमों ने प्रगतिशील, शानदार और व्यापक समझ वाला निरूपित किया तो इस पर बहुत ज्यादा आश्चर्य व्यक्त नहीं किया जाना चाहिए। कल (सोमवार) को वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी द्वारा पेश किए जाने वाले वर्ष 2009-10 के बजट को लेकर भी कुछ इसी तरह की प्रतिक्रियाओं का इंतजार किया जा सकता है। यूपीए की सरकार पांच वर्षो तक सत्ता में रहने वाली है और हर साल ऐसे ही बजट पेश होंगे और फिर ऐसी ही प्रतिक्रियाएं देखने-पढ़ने को मिलेंगी। जो लोग सरकार में होते हैं वे अपनी हर घोषणा को आम जनता के हित में और विकासोन्मुखी बताते हैं और जो विपक्ष मंे होते हैं ठीक उसके विपरीत। प्रतिक्रियाओं का यह अंतहीन सीरियल पहले आम चुनाव के बाद से ही लगातार चल रहा है। यही विपक्ष...

जनरल बोगी का नज़ारा....!

मैं आज सुबह लखनऊ - कानपूर से वापस आया हूँ, वहां काम के सिलसिले मे अक्सर जाना होता है । मैं मंगलवार की रात को आगरा से मथुरा - पटना एक्सप्रेस से चला था अचानक जाना पड़ा इसीलिए रिज़र्वेशन नही था तो जनरल बोगी मे सफर किया । जनरल बोगी की हालत बहुत ख़राब है उसमे बैठने के लिए ९० सीट होती हैं, ऊपर की तरफ़ एक बर्थ होती है जिस पर लोग सो जाते हैं या फिर अपना सामान रख लेते है जब भीड़ ज्यादा होती है तो वहां पर लोग बैठ जाते है, आमतौर पर लेटने की जगह नही मिलती है बैठकर ही जाना पड़ता है । परसों भीड़ कुछ कम थी इसलिए चार लोगो की एक सीट पर छह लोग बैठे थे, ऊपर की बर्थ पर तीन लोग बैठे थे, और बाकी जो बचे थे वो सब ज़मीन पर लेट गए । आगे पढे....