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Showing posts with the label नारी शरीर

डा श्याम गुप्त के दोहे--

सारांश यहाँ आगे पढ़ें के आगे यहाँ--- कविताई का सत्य-- जिनकी कविता में नहीं ,कोई कथ्य औ तथ्य। उनकी कविता में कहां, श्याम’ ढूढिये सत्य ॥ तुकबन्दी करते रहें, बिना भाव उद्देश्य । देश धर्म ओ सत्य का, नहीं कोई परिप्रेक्ष्य॥ कला कला सौन्दर्य रस, रटते रहें ललाम । जन मन के रस भाव का, नही कोई आयाम॥ गूढ शब्द पर्याय बहु, अलन्कार भरमार । ज्यों गदही पर झूल हो, रत्न जटित गल हार ॥ कविता वह है जो रहे, सुन्दर सरल सुबोध । जन मानस को कर सके, हर्षित प्रखर प्रबोध ॥ अलन्कार रस छन्द सब, उत्तम गहने जान। काया सच सुन्दर नही, कौन करेगा मान ॥ नारि दर्शना भव्य मन, शुभ्र सुलभ परिधान । भाल एक बिन्दी सहज़, सब गहनों की खान ॥ स्वर्ण अलन्क्रत तन जडे, माणिक और पुखराज भाव कर्म से हीन हो, नारि न सुन्दर साज ॥ भाव प्रबल,भाषा सरल, विषय प्रखर श्रुति -तथ्य । जन जन के मन बस सके, कविताई का सत्य ॥

कौमार्य बेचा, रात गुजारी अब पछतावा..

प ढ़ाई को अपनी मंजिल तक पहुंचाने के लिए विदेशों में लड़कियां अब किसी भी हद तक जाने से गुरेज नहीं कर रही हैं। और अब लड़कियां अपनी वर्जानिटी (कौमार्य) को भी मजह चंद पैसों में बेच दे रही हैं। कौमार्य बेचने की घटना विदेशों में बढ़ती ही जा रही है। पढ़ाई के लिए कौमार्य बेचने की ढ़ेर सारी घटनाएं सामने आई हैं, जिसे देखकर यही लगता है कि विदेशों में पढ़ाई के लिए युवा किस गलत राह पर जा रहे हैं। चंद रूपयों की खातिर लड़कियां न सिर्फ अपना देह बेच रही हैं बल्कि उनका खुलेआम प्रचार भी कर रही हैं। सबसे बड़ी बात है कि इस गलत तरीके के खिलाफ अभी तक किसी सामाजिक संगठन ने हस्तक्षेप नहीं किया है। आइए डालते हैं लड़कियों के कौमार्य बेचने की घटनाओं पर एक नजर. .. रोजी ने 6 लाख में बेच दिया कौमार्य.. लंदन में पढ़ाई की खातिर 18 साल की रोजी ने अपनी वर्जीनिटी को सिर्फ 6 लाख में बेच दिया। रोजी ने अपने कौमार्य को बेचने के लिए बाकायदा नेट पर नीलामी करवाई थी, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। एक 40 साल के इंजीनियर ने रोजी के कौमार्य को 8400 पाउंड(6 लाख रूपए) में खरीद लिया। जिसके बाद रोजी ने एक होटल में उस इं...

हीर रांझा के मुल्‍क में फिजा और चाँद

अब फिजा में चाँद नहीं रहेगा। यूँ तो फिजा और चाँद की दूरियां पिछले कुछ दिनों से लगातार बढ़ ही रही थीं लेकिन अब चाँद ने तलाक ले लिया है। चाँद और फिजा के बारे में अब तक बहुत कुछ सुना जा चुका है ओर उतना ही लिखा जा चुका है। दोनों के बीच जो भी हुआ कुछ तेज हुआ, तेजी परवान चढ़ी। हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री चंद्रमोहन, चांद मुहम्मद और अनुराधा बाली फिजा बन गए। सब कुछ बड़ी जल्‍दी में हुआ। दोनों ने इसे प्‍यार इश्‍क और मोहब्‍बत का नाम दिया और एक दूसरे से ब्‍याह रचा दिया। समाचार चैनलों, अखबारों में धड़ाधड़ फोटो छपे, बयान आए। चाँद उस फिजा में मुस्‍करा रहा था, और फिजा भी बेहद खुश थी। अब खबर है कि चाँद ने लंदन से ही फोन पर फिजा को तलाक दे दिया है। हाथों की मेंहदी सूखी भी न थी कि चाँद को चंद्रमोहन का परिवार याद आ गया। उसे पहली पत्‍नी ओर बच्‍चे याद आने लगे। आने भी चाहिए थे, आखिर परिवार तो परिवार है। वैसे ये नितांत व्‍यक्‍तिगत मामला है और कोई भी आदमी प्‍यार करने घर बसाने के लिए पूरी तरह से आजाद है। औरत हो या आदमी, राजा हो या रंक, हर किसी को अपनी जिंदगी पूरी तरह से और अपने तरीके से जीने का अधिकार है और आ...

पेट भरने के लिए चकले खुलवाना चाहती हैं महिलाएं!

आतंकवाद ने जम्मू कश्मीर में कई परिवारों को तबाह कर दिया है। हजारों लोग आज भी बेघर हो विस्थापन कैंप में जिंदगी गुजार रहे है। सरकार इन लोगों की खराब हालत के बारे में जानती तो है लेकिन वायदों के सिवाए कुछ नहीं करती। जम्मू के एक इलाके में विस्थापितों की हालत भी कुछ इसी तरह है। लेकिन सिटीज़न जर्नलिस्ट बलवान सिंह पिछले 10 साल से इन लोगों के अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। उनकी लड़ाई है आतंकवाद की वजह से विस्थापित हुए लोगों को सरकार से मुआवजा दिलवाने के लिए। कश्मीर के बाकी जिलों की तरह रियासी भी आतंकवाद की चपेट में था। खून खराबे के बीच 1998-99 में लगभग 1000 परिवार अपनी जान बचाकर अपना घर बार छोड़ कर तलवाड़ा कैंप पहुंचे। इनके पारिवार के कई लोगों को आतंकियों ने मार दिया और कई को उनके ही घर से खदेड़ दिया। यहां पहुंच कर इनकी जान तो बच गई लेकिन जिंदगी को नए सिरे से दोबारा शुरू करना इनके लिए मुश्किल हो गया। इनके पास न सिर पर छत थी और न खाने की व्यवस्था। बच्चे भूखे मर रहे थे। हालत यहां तक बिगड़े कि अपना पेट पालने के लिए इन्होंने अपने बच्चों को बेचने की मंडी लगाई। कुछ औरतों ने तो सरकार से चकला शुरू करने ...

आप लोग जिंदगी भर गवार ही रहना चाहते हो क्या?

संजय जी ने कहा -- व्योम जी जैसा की मैंने आपसे पहेले भी कहा था की यह मंच सिर्फ विचारों का है अच्छे विचारों का तो यहाँ पर इस तरह की बातें शोभा नहीं देती !और आपको लेकर मुझे एक और समस्या है की ''आप शायद ऐसा कुछ कर जाते है जिससे लोग व्योम श्रीवास्तव और संजय सेन सागर को एक ही व्यक्ति मानकर चलते है !इसमें मुझे कोई परेशानी तो नहीं है ,पर इस तरह की पोस्ट वाली मानसिकता मेरी नहीं है !सो आगे से आप धयन रखें की अश्लीलता न हो और हमेशा सबको कुछ अच्छा देने की कोशिश करो !जय हिन्दुस्तान -जय यंगिस्तान आप लोग जिंदगी भर गवार ही रहना चाहते हो क्या? मैं यह जानना चाहता हूँ की आप लोग क्या जिंदगी भर गवार ही बने रहना चाहते हो आखिर आप लोग सेक्स का नाम आते ही इतने डर क्यों जाते हो,हमारे जिंदगी का ही एक भाग तो है !अगर आपको लगता है की देश विकास कर रहा है तो यह देश के विकास मे शामिल नहीं होना चाहिए?मैं संजय जी आपकी हालत समझ सकता हूँ अभी आपकी उम्र मुझसे कम है शायद इसलिए आप इसे जायज नहीं ठहरा पा रहे हो लेकिन भविष्य मे आप मेरे साथ हो जाओगे यह तय है ! और मैंने ऐसा क्या कर दिया की लोग आपको और मुझे एक समझने लगे ,...

आज भी हावी है अंधविश्वास

आधुनिक समाज चाहे प्रगति के जितने दावे करे मगर मध्यप्रदेश में अंधविश्वास की जड़ें अब भी गहरी हैं। इसका प्रमाण गुरुवार को मंदसौर की पिपलिया मंडी में देखने को मिला जहां पुलिस की मौजूदगी में हत्या के एक आरोपी ने समाज की पंचायत में आग से तपकर सुर्ख लाल हो चुकी सलाखों को हाथों में उठाकर अपनी बेगुनाही का सबूत दिया।जानकारी के मुताबिक पिपलिया मंडी में जनवरी माह में घनश्याम नाम के एक व्यक्ति की हत्या हुई थी। इस मामले में पुलिस ने अन्य आरोपियों के साथ लाल सिंह को भी आरोपी बनाया। जानकारी के मुताबिक पिपलिया मंडी में जनवरी माह में घनश्याम नाम के एक व्यक्ति की हत्या हुई थी। इस मामले में पुलिस ने अन्य आरोपियों के साथ लाल सिंह को भी आरोपी बनाया। अंधविश्वास का खुलाशा करती जोश-18 की यह रिपोर्ट । पढ़ें: एक टोटके से सुखमय जीवन में पड़ी दरार मृतक और आरोपी सिंह, दोनों का नाता बाबरी मोंगिया समाज से है। इस समाज में परम्परा है कि व्यक्ति अगर अपने को निर्दोष बताता है तो उसे पंचायत के सामने उसका प्रमाण देना होता है।बाबरी मोंगिया समाज की परम्परा के मुताबिक गुरुवार को पिपलिया मंडी में पंचायत लगी। इसमें पहुंचे लाल ...

बहस मनोरंजक होती जा रही है!

प्रिय श्री संजय ग्रोवर, (www.samwaadghar.blogspot.com) ,   सबसे पहले तो आपको आपकी उत्कृष्ट लेखन शैली के लिये बधाई दिये बिना मैं रह नहीं पा रहा हूं।   मुझे लगता है कि यदि आप किसी को गाली भी देते होंगे तो उसे उसमे भी सुवाली जैसा ही आनंद आता होगा।   जैसा कि मैने पहले भी जिक्र किया था , मैं ब्लॉग्स की दुनिया में नया - नया बाशिंदा हूं । अभी एक ब्लॉग पर देखा कि उसके स्वामित्वाधिकार को लेकर मार - काट मची हुई है। लोग मिलते जुलते नाम वाले कई सारे ब्लॉग बनाने में जुटे हैं। ऐसे में आपने जिस प्रकार भूमिका बांधते हुए मेरी टिप्पणी को पोस्ट की तरह प्रकाशित किया तो मुझे लगा कि जरूर यह कोई विशेष घटना है।   शायद आम तौर पर ऐसा नहीं होता होगा।   इसीलिये आपकी दरियादिली की तारीफ में कुछ कह बैठा था ।   यदि कुछ अनुचित लिख बैठा था तो क्षमा प्रार्थी हूं ।   डी - सेक्सुअलाइज़ेशन शब्द मैने आपके ही कॉलम में पढ़ा था ।   हो सकता है , आपकी पोस्ट के उत्तर में आई हुई टिप्पणियों में से किसी एक में रहा हो ।   पर शब्द न भी सही , विचार तो आपके यही हैं न ? " स्त्री को अपनी कई समस्याओं से जूझने-निपटने क...