अपना जहाँ ख़ुद ही खो दिया अब भटक रहा हूँ कैसे ?खो दिया ये भी पता नही साँसे थम गई आवाज...... वो भी गुम हो गई मेरी मंजिल तो मिली नही दुसरे का ढूढ़ रहा हूँ अपने ही घर में आग लगाया अब पानी खोज रहा हूँ अँधेरी रात को अपनाया और भटक गया अब चाँद से उजाला मांग रहा हूँ अपना जहाँ ख़ुद ही खो दिया अब भटक रहा हूँ