वर्ष की अंतिम पोस्ट---परमार्थ को यदि हम जीवन लक्ष्य बनाएं तो सभी उपलब्धियों की महत्ता है --- श्याम सवैया ....परमार्थ.... (श्याम सवैया छंद—६ पन्क्तियां ) प्रीति मिले सुख-रीति मिले, धन-मीत मिले, सब माया अजानी। कर्म की,धर्म की,भक्ति की सिद्धि-प्रसिद्धि मिले सब नीति सुजानी। ज्ञान की,कर्म की,अर्थ की रीति,प्रतीति सरस्वति-लक्ष्मी की जानी। ऋद्धि मिली,सब सिद्धि मिलीं, बहु भांति मिली निधि वेद बखानी । सब आनन्द प्रतीति मिली, जग प्रीति मिली बहु भांति सुहानी । जीवन गति सुफ़ल सुगीत बनी, मन जानी, जग ने पहचानी ॥ जब सिद्धि नहीं परमार्थ बने, नर सिद्धि-मगन अपने सुख भारी । वे सिद्धि-प्रसिद्धि हैं माया-भरम,नहिं शान्ति मिले,बहुविधि दुखकारी। धन-पद का,ग्यान व धर्म का दम्भ,रहे मन निज़ सुख ही बलिहारी। रहे मुक्ति के लक्ष्य से दूर वो नर,पथ-भ्रष्ट बने वह आत्म सुखारी। यह मुक्ति ही नर-जीवन का है लक्ष्य,रहे मन,चित्त आनंद बिहारी। परमार्थ के बिन नहिं मोक्ष मिले, नहिं परमानंद न कृष्ण-मुरारी॥ ...