शब्द-शब्द से छंद बना तू। श्वास-श्वास आनंद बना तू॥ सूर्य प्रखर बन जल जाएगा, पगले! शीतल चंद बना तू॥ कृष्ण बाद में पैदा होंगे, पहले जसुदा-नन्द बना तू॥ खुलना अपनों में, गैरों में ख़ुद को दुर्गम बंद बना तू॥ 'सलिल' ठग रहे हैं अपने ही, मन को मूरख मंद बना तू॥ ********************