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होली पर -श्याम मधुशाला -----

श्याम मधुशाला शराव पीने से बड़ी मस्ती सी छाती है , सारी दुनिया रंगीन नज़र आती है । बड़े फख्र से कहते हैं वो , जो पीता ही नहीं , जीना क्या जाने , जिंदगी वो जीता ही नहीं ।। पर जब घूँट से पेट में जाकर , सुरा रक्त में लहराती । तन के रोम - रोम पर जब , भरपूर असर है दिखलाती । होजाता है मस्त स्वयं में , तब मदिरा पीने वाला । चढ़ता है उस पर खुमार , जब गले में ढलती है हाला। हमने ऐसे लोग भी देखे , कभी न देखी मधुशाला। सुख से स्वस्थ जिंदगी जीते , कहाँ जिए पीने वाला। क्या जीना पीने वाले का, जग का है देखा भाला। जीते जाएँ मर मर कर, पीते जाएँ भर भर हाला। घूँट में कडुवाहट भरती है, सीने में उठती ज्वाला । पीने वाला क्यों पीता है, समझ न सकी स्वयं हाला । पहली बार जो पीता है ,तो, लगती है कडुवी हाला । संगी साथी जो हें शराबी , कहते स्वाद है मतवाला । देशी, ठर्रा और विदेशी , रम,व्हिस्कीजिन का प्याला। सुंदर -सुंदर सजी बोतलें , ललचाये पीने वाला। स्वाद की क्षमता घट जाती है , मुख में स्वाद नहीं रहता । कडुवा हो या तेज कसैला , पत...

जब शौच से उपजे सोना

जब कोई युवा पढ़ाई-लिखाई करके शहरों की ओर भागने की बजाय अपनी शिक्षा और नई सोच का उपयोग अपने गाँव, ज़मीन, अपने खेतों में करने लगे तो बदलाव की एक नई कहानी लिखने लगता है, ऐसे युवा यदि सरकार और संस्थाओं से सहयोग पा जाएं तो निश्चित ही क्रान्तिकारी परिवर्तन ला देते हैं। ऐसी ही एक कहानी है ‘जब शौच से उपजे सोना’ की और कहानी के नायक हैं युवा किसान श्याम मोहन त्यागी...... आर के श्रीनिवासन, डाऊनटूअर्थ की रपट अपने हरे-भरे खेतों की ओर उत्साह और खुशी से इशारा दिखाते हुए श्याम मोहन त्यागी बताते हैं “आसपास के खेतों के मुकाबले मेरी फ़सल ज्यादा अच्छी हुई है, कारण मानव मल-मूत्र की बनी खाद।“ अपने खेतों की ओर देखते हुए उनकी आंखों में चमक है। श्याम मोहन त्यागी गांव- असलतपुर, वाया भोपुरा मोड़, गाजियाबाद, के निवासी हैं। श्याम ने अपने खेतों में रासायनिक खादों का इस्तेमाल करना सन् 2006 से बन्द कर दिया था। खाद के लिये वह अपने गांव के सार्वजनिक शौचालय से मानव मल-मूत्र इकट्ठा करते हैं। चूंकि यह सार्वजनिक शौचालय "पर्यावरणमित्र शुष्क शौचालय" है, मल-मूत्र ठोस और द्रव रूप में अलग-अलग खुद-ब-खुद मिल जा...

बच्चों पर भारी कश की लत

भो पाल. सिगरेट के कश लेने में अब बच्चे भी पीछे नहीं हैं। 80 फीसदी बच्चे 18 साल की उम्र पूरी होने के पहले सिगरेट पीना शुरू कर देते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार बच्चों में सिगरेट पीने की प्रवृत्ति उनके अभिभावकों की आदतों से पनपती है। मनोचिकित्सकों के मुताबिक जिन बच्चों के परिवार में खुलेआम सिगरेट पीने, तंबाकू खाने का चलन है उन परिवारों के बच्चों के दिमाग का विकास सही तरीके से नहीं हो पाता। इसके चलते बच्चे अपने अभिभावकों की प्रत्येक अच्छी और बुरी आदत जल्द ही अपना लेते हैं। अभिभावकों की यही स्मोकिंग की आदत बच्चे को सिगरेट पीना सिखा देती है। शहर में पहचाने गए कैंसर रोगियों में कम उम्र में सिगरेट का नशा करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। डॉक्टरों के अनुसार कम उम्र में सिगरेट, तंबाकू का शौक करने वाले बच्चों को मुंह का कैंसर, गले का कैंसर जल्दी हो जाता है। पापा का घर में सिगरेट पीना लगता है बुरा शक्ति नगर निवासी मुकेश श्रीवास्तव के 14 वर्षीय पुत्र आयुष को पापा का घर में सिगरेट पीना बुरा लगता है। आयुष ने बताया कि पापा जब भी सिगरेट पीते हैं तो मैं उनसे नाराज हो जाता...

22 वर्षीय विवाहिता के साथ गैंग रेप

खरड़. लुधियाना के गांव हैबोवाल निवासी 22 वर्षीय विवाहिता ने अपने परिचित और उसके दो साथियों पर गैंग रेप का आरोप लगाया है। घटना मंगलवार को हुई। आरोपियों में चंडीगढ़ का प्रॉपर्टी डीलर मेहर चंद और उसके दो साथी शामिल हैं। दो वर्ष पहले ब्याही गई और एक बच्चे की मां पीड़िता वीरवार को पति के साथ पुलिस के पास आई। सिटी प्रभारी अतुल सोनी ने बताया कि महिला का मेडिकल करवाया गया है। शिकायतकर्ता के मुताबिक मेहर चंद करीब 6 माह पहले उसके सम्पर्क में आया था। गत मंगलवार मेहर ने उसे फोन कर खरड़ बुलाया, जहां उसके दो अन्य साथी भी थे। तीनों उसे एक स्थान पर ले गए और रेप किया। पीड़िता शिकायत लेकर पहले सिटी पुलिस के पास गई थी, जहां कारवाई न होने पर वह एसएसपी से मिली। मामले की जांच डीएसपी खरड़ को सौंपी गई। उन्होंने इसे सिटी प्रभारी को सौंपा। जानकारी के मुताबिक महिला की पहले सुनवाई न करने वाले एएसआई जागीर सिंह भी इस मामले में जांच के घेरे में आ गए हैं। उनके विरुद्ध भी विभागीय जांच शुरू की गई है। सिटी पुलिस द्वारा एएसआई के रवैये को लेकर डीएसपी को लिखा गया है। एसएसपी जतिंदर सिंह औलख ने कहा कि एएसआई जागीर सिंह द्वारा...

हमें शिकायत करने का हक नहीं हैं.....!!! भाग - १

लो कसभा के चुनाव आ रहे हैं , आगे पढ़े लागु हो गई है ... हर पार्टी अपने - अपने प्रत्याशी खड़े कर रही है जिनको टिकट मिल गया है या मिलने वाला है उन्होंने लोगो के पास चक्कर लगाने शुरू कर दिए हैं वोटो के लिए । लेकिन जब भी चुनाव आते हैं हमारे पास शिकायतों के भण्डार निकल आते हैं की यह नहीं किया , वो नही किया , जो किया था तो वो बेकार हो गया , उसका रखरखाव नही किया ....... हमें यह सब शिकयेते करने का हक नहीं है क्यूंकि इन सब चीजों के जिम्मेदार हम लोग हैं और कोई नहीं हैं । कभी अपने आप से पुछा हैं की तुम कितने नियमो का पालन करते हो ? तुमने अपने अलावा कभी किसी के बारे मे सोचा है ? हम हमेशा नियम तोड़त हैं , कानून को तोड़ते हैं और सरकार पर इल्जाम लगाते है की उन्होंने क़ानून की कमर तोड़ दी है जबकि ऐसा कुछ नहीं हैं । हम मे से कितने लोग हैं जो सड़क पर चलते वक्त सारे कानूनों ...